Moral Stories in Hindi – बुरे के अच्छे कर्म – Moral Stories

Moral Stories in Hindi – बुरे के अच्छे कर्म | Moral Stories

Hindi Moral Stories / Moral Stories in Hindi | Story in Hindi 

एक कबूतर पेड़ पर बैठा गुटर-गू गुटर-गू कर रहा था | हवा की गति भी मंद थी और दूसरे पक्षी भी अपने-अपने घोसलो में दुबके हुये थे | गर्मी कुछ ज्यादा ही जोर दिखा रही थी |

मगर उसे तो मस्ती आ रही थी | अपनी ही मस्ती में वह कोई गीत गुनगुना रहा था | साथ-ही-साथ आसपास का निरीक्षण भी कर रहा था |

अचानक न जाने कहां से एक पत्थर उड़ता हुआ आया और उसकी आंख पर पड़ा | अगले ही पल वह अपनी चेतना  खो बैठा | उसे एहसास ही नहीं रहा कि वह कहां है, जिंदा है या नहीं |

सभी पक्षी अपने-अपने घोसले में दुबके हुये थे | मगर कालू कोआ यह नजारा देख रहा था | उसे भूरे कबूतर पर दया आ रही थी |

और फिर आखिरकार मन से मजबूर होकर कालू ने पंख फड़फड़ाए और उड़ता हुआ भूरे के घोसले पर जा पहुंचा | उसने देखा कि भूरा घोसले में चित पड़ा था | उसकी आंख से खून बह रहा है और मुंह से झाग आ रहे है | भूरे की हालत पर कालू का दिल पसीज गया | उसने भूरे को ठीक से लिटाया और पानी लेने के लिए नदी की और उड़ चला | नदी पर पहुंचकर उसने चोच में पानी भरा और वापस उड़ गया भूरे के घोसले पर आकर उसने वह पानी भूरे के मुंह पर डाला | मगर भूरे को होश नहीं आया | वह पुन: नदी पर पहुंचा और चोच में पानी लाकर भूरे के मुंह पर डाला |

लेकिन वह फिर भी होश में नहीं आया |

तब कालू अपने एक कुत्ते मित्र के पास पहुंचा | उससे एक छोटा बर्तन लेकर नदी से पानी लाया और भूरे कबूतर के  मुंह पर छिड़का | कुछ देर की मेहनत के बाद भूरे को होश आया | मगर अधूरा ही आया |

बेहोशी की हालत में भूरा कबूतर बढ़बढ़ाया – “ पानी ”

इतना सुनते ही कालू नदी से पानी ले आया और भूरे को पिलाया | पानी पीकर भूरा फिर से बेहोश हो गया |

और शाम को जब उसे होश आया तो वह फिर बढ़बढ़ाया – “ खाना | भूख ”

कालू जो उसके पास ही बैठा था | यह सुनकर तेजी से पास के बाग की तरफ उड़ गया |

और जल्दी ही कुछ फल लेकर वापस भूरे के घोसले पर आ गया | भूरा अभी भी अर्ध बेहोशी की अवस्था मे था | कालू ने उसे उसी अवस्था में अपने हाथों से खाना खिलाया |

और फिर !

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चार दिन के बाद जब पूरा होश में आया तो सामने वाले को देखकर उसका मूड खराब हो गया | वह और बेजान-सा हो गया |

उसकी यह दशा देखकर कालू कोए ने कहा – “ भैया ! तुम डरो मत | मैं तुम्हारा दोस्त हूं, अब तुम बिलकुल ठीक हो |”

“ तुम यह क्या अनाप-शनाप बक रहे हो ” कालू की बात सुनकर भूरा बोला |

“ क्यों क्या हुआ, भैया ” कालू ने भोलेपन से पूछा |

“ क्या हुआ ? अरे तुम काले कोए और मैं गोरा कबूतर तुम्हारा-हमारा साथ कैसे हो सकता है |” भूरे कबूतर ने कुछ अकड़कर कहा |

यह सुनकर कालू को क्रोध आ गया | मगर वह अपने क्रोध को पीकर बोला – “ अच्छा भैया ! जरा यह तो बताओ, कि तुम्हें याद है | तुम्हारी यह हालत कैसे हुयी ?” कोए ने हल्के से क्रोधित लहजे में पूछा |

“ पता नहीं बस इतना याद है कि, मैं घोसले पर बैठा था कि कोई वस्तु संग से आकर मेरी आंख पर लगी और फिर मुझे कुछ पता नहीं रहा | उस बात को याद करके तो ऐसा लगता है कि, जैसे वह वस्तु अभी-अभी आकर आंख पर लगी है |” कबूतर ने बताया |

“ उसके बाद जानते हो क्या हुआ ?” कोए ने उसी लहजे में पूछा |

“ नहीं ” कबूतर ने कोऐ के चेहरे को देखते हुए जवाब दिया |

“ मैं बताता हूं, सुनो तुम्हारे बेहोश हो जाने पर मैंने तुम्हारी देखभाल करी | जब तुम बेहोशी में पुकारते ‘पानी’ तो मैं तुम्हें नदी से पानी लाकर पिलाता | जब तुम कहते ‘खाना’ मैं तुम्हें खाना खिलाता और ऐसा एक दो  बार नहीं, पूरे चार दिन तक किया है मैंने और सही हो जाने पर तुम कहते हो, कि तुम गोरे और मैं काला | गोरे-काले का क्या साथ है | भाई मेरे यह गोरा-काला तो चमड़ी का हेरफेर है | वरना तुम खुद देख लो कि, जो चीज तुम्हारे हैं क्या वही मेरे नहीं | या फिर मेरे सिंग निकल रहे हैं | नहीं भाई यह सब तो चमड़ी का खेल है, खैर सबकी-करनी सबके साथ – चलता हूं |” कहकर कालू कौआ वहां से जाने लगा |

अब तक खामोश बैठा कबूतर बोला – “ ठहरो भाई ! मैं समझ गया कि क्या काला है और क्या गोरा | मैं समझ गया कि सफेद चमड़ी वाला गोरा नहीं होता, गोरा वह होता है जिसके मन पर कालिख ना हो | जो अच्छे कर्म करता हो |  रंगो से गोरे-काले का फैसला नहीं किया जा सकता |” कहकर भूरे कबूतर ने काले कौवे को गले से लगा लिया |

इस प्रकार यह बात सिद्ध हो गयी कि मनुष्य के अच्छे कर्म और उसका भला हृदय ही गोरे होते हैं, ना की चमड़ी |

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शिक्षा – “ अच्छे कर्म करने वाले को अच्छा ही कहा जायेगा, चाहे लोग उसे कितना भी बुरा समझे | परंतु यदि उसने एक भी काम अच्छा कर दिया है, तो अब वह अच्छा ही माना जायेगा | जिस प्रकार कोए को सभी लोग बुरा समझते हैं | लेकिन इस कोए ने एक भूरे कबूतर की जान बचाकर सिद्ध कर दिया, कि बुरा प्राणी भी अच्छे कर्म कर सकता है |”

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Written by lokhindi
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