आजाद भारत : New Hindi Essay – उपलब्धियांँ और चुनौतियांँ

Essay in Hindi

Independent India: Achievements and Challenges / आजाद भारत:उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ | आजाद भारत : New Hindi Essay | Republic day Essay


आधार बिंदु :
1. आत्म-मूल्यांकन का अवसर
2. लोकतांत्रिक व्यवस्था का निर्माण
3. कृषि
4. उद्योग
5. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
6. शिक्षा
7. स्वास्थ्य
8. अधिसंरचना के अन्य क्षेत्र
9. लोकतांत्रिक समाज का निर्माण
10. हमारे विकास के छिद्र
11. हमारी चुनौतियांँ
12. हमारा लक्ष्य : दूसरी आजादी

आत्म-मूल्यांकन का अवसर : आजाद भारत : New Hindi Essay

एक देश के जीवन में 57 वर्ष कोई लंबी अवधि नहीं होती किंतु भारत के लिए 15 अगस्त, 1947 के बाद की यह आधी शताब्दी अनेक दृष्टियों से उल्लेखनीय है । हमने 50 वर्ष पूर्व एक और ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्ति पाई थी वहीं दूसरी ओर सदियों से स्थापित देशी राजतंत्रों से भी आजादी मिली थी । यह एक और जहां भारतीय जनता पर शताब्दियों से छाई रही राजनीतिक गुलामी से मुक्ति थी वहीं दूसरी ओर जीवन के हर क्षेत्र में जनता की भागीदारी से अपना विकास करने का अवसर भी था । इसलिए हमें इस आधी शताब्दी का विशेष रूप से यह मूल्यांकन करना चाहिए कि आजाद होने के बाद हमने अपने विकास को क्या-क्या मोड़ दिए, कहांँ कहांँ सफल हुए और कहांँ कहाँ हम अभी भी कमजोर बने हुए हैं । You Read This आजाद भारत : New Hindi Essay on Lokhindi.com

लोकतांत्रिक व्यवस्था का निर्माण : आजाद भारत : New Hindi Essay

आजाद होने के बाद हमने लोकतांत्रिक देश का संविधान बनाया, राजतंत्र के स्थान पर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का ढांँचा खड़ा किया, अलग-अलग रियासतों में बंँटे देश को पुनर्गठित कर इसे प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया । दूसरी ओर आर्थिक विकास के लिए हमने पंचवर्षीय योजनाएँ शुरू कीं, निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र में उद्योग धंधों को विकसित करके एक मिश्रित आर्थिक ढांँचा खड़ा करने का प्रयास किया । शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सामाजिक विकास की नई प्रक्रिया शुरू कीं, भारतीय संस्कृति एवं भाषाओं के गौरव को पहचाना तथा उन्हें महत्व देना शुरू किया । इस प्रकार पिछली आधी शताब्दी में भारत ने हर क्षेत्र में एक नई करवट ली, दुनिया में सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का गौरव प्राप्त किया । दरअसल हमारी आजादी के बाद का यह समय लोकतांत्रिक समाज के रूप में अनेक दृष्टियों से अपनी पहचान बनाने का महत्वपूर्ण प्रयास रहा है । यद्यपि भारत की जिस आजादी के लिए सन् 1957 से लेकर 1947 तक, 90 वर्षों में क्रांतिकारियों ने अपने जीवन की बाजी लगाकर हंसते-हंसते कुर्बानी दी थी, हम अपने उस स्वप्निल मार्ग से निश्चित ही भटक गए हैं; किंतु अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं को बरकरार रखते हुए हम विकास के विविध क्षेत्रों में जिन बुलंदियों तक पहुंचे हैं वह उस पराधीन भारत से हर हाल में बेहतर है जिसे 200 वर्षों से भी अधिक समय तक शोषित कर अंग्रेज छोड़ गए थे ।

कृषि : आजाद भारत : New Hindi Essay

पिछले 50 वर्षों के दौरान हमारे देश में कृषि के विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है । हम वार्षिक अनाज उत्पादन में 5 करोड टन से 20 करोड़ टन तक पहुंच गए हैं । भारतीय नागरिक 1950 के प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 350 ग्राम अन्न तुलना में 1997 में 529 ग्राम प्रति व्यक्ति अन्न की खपत कर रहा है । तिलहन, कपास, गन्ना, इलायची आदि के उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है । इसी प्रकार 1950 में प्रति व्यक्ति 1127 रुपए वार्षिक आय से हम 2001 में 10254 रूपये तक पहुंचे । हम 1950 की तुलना में 4 गुना चावल, 11 गुना गेहूं, 2 गुना दालें, 5 गुना तिलहन, 3 गुना चाय, 5 गुना कपास पैदा करने लगे हैं । इसी प्रकार दूध का उत्पादन 4 गुना, अंडे का उत्पादन 13 गुना तथा मछली का उत्पादन 5 गुना हो गया है । यही नहीं, उर्वरक की खपत 23 गुना बढ़ गई है, सिंचाई का क्षेत्र 4 गुना बढ़ गया है तथा प्रति हैक्टेयर अनाज का उत्पादन 1950 में 522 किलो के स्थान पर 1999 में 1500 किलो पहुंच गया है । इस प्रकार 1947 में आयात करके अपना पेट भरनेवाले हम अब कृषि के क्षेत्र में जनसंख्या के बढ़ने के बावजूद आत्मनिर्भर बने हुए हैं तथा अनेक कृषि उत्पादों का निर्यात भी कर रही हैं ।

उद्योग : आजाद भारत : New Hindi Essay

हमारे देश ने पिछली आधी शताब्दी में औद्योगिक क्षेत्र में विशेष प्रगति की है । 1950 में औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक 18 से बढ़कर अब 1997-98 में 300 पर चला गया है । उद्योगों में 1950 में जहां 3360 करोड रुपए की पूंँजी लगी हुई थी, अब वह 800 हजार करोड़, अर्थात लगभग 200 गुना हो गई है । अब हम 1999 2000 में 1950 की तुलना में 24 गुना कोयला तथा 80 गुना लोहा, 20 गुना इस्पात, 25 गुना सीमेंट, 66 गुना उर्वरक, 15 गुना चीनी, 4 गुना कपड़ा उत्पादित कर रहे हैं । जहांँ एक और हमने भारी मशीनरी तथा उच्च तकनीकी का आयात किया वहीं दूसरी ओर हम कपड़ा, पटसन, रेशम, हभकरघे का कपड़ा, दस्तकारी की अन्य वस्तुएंँ, रबर, इंजीनियरिंग का सामान, चमड़ा, चाय आदि का निर्यात भी कर रहे हैं । द्रुत औद्योगिक विकास के जरिए हमने अधिकांश उपभोग वस्तुओं में आत्म-निर्भरता प्राप्त की है तथा विश्व के प्रथम 10 औद्योगिक देशों में पहुंच गए हैं । कुटीर उद्योगों के उत्पादों का कुल निर्यात में 34% का हिस्सा है ।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी : आजाद भारत : New Hindi Essay

हमने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को लेकर पिछली आधी शताब्दी में विशेष प्रगति की है । भारत 1969 में परमाणु ऊर्जा बिजलीघर तारापुर में शुरू करके 4 और बड़े विद्युत केंद्र स्थापित कर चुका है और संसार के उन थोड़े से देशों में शामिल हो गया है जो परमाणु ईंधन से संपन्न क्रियाकलाप स्वयं कर सकते हैं । 1972 में भारत ने बाह्य अंतरिक्ष कार्यक्रम प्रारंभ कर दिया जिसके कारण दूरसंचार, दूरदर्शन प्रसारण, मौसम विज्ञान, संसाधन संरक्षण आदि को बढ़ावा मिला । 1983 में इनसेट-1 बी भू-उपग्रह छोड़कर इनसेट पद्धति स्थापित की गई । इसके बाद हमने अनेक उपग्रह छोड़े हैं । अंतरिक्ष के क्षेत्र में हम 6 अग्रणी देशों में से एक है । भारत अब 1000 किग्रा. भार तक के उपग्रहों को ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करने की क्षमता प्राप्त कर चुका है तथा विदेशों के लिए उपग्रह छोड़ने की भी सेवा कर रहा है । इलेक्ट्रॉनिक्स में हमने सुपर कंप्यूटर भी तैयार कर लिया है । 1997 में हमने 6300 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्यात किया है । 1974 में परमाणु विस्फोट करके तथा 11 व 13 मई 1998 को 5 विभिन्न प्रकार के परमाणु विस्फोट कर, दुनिया में परमाणु बम बनाने की तकनीकवाला हमारा देश छटा देश बन गया है । मिसाइल प्रौद्योगिकी में भी हमारा देश छठा है ।

शिक्षा : आजाद भारत : New Hindi Essay

स्वाधीनता के बाद सरकार ने सभी बच्चों को कम से कम प्राथमिक स्तर तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने की नीति अपनाई । 1986 में स्वीकृत नई शिक्षा नीति के अंतर्गत गुणात्मक शिक्षा के सार्वजनिकरण को महत्व दिया गया जिसमें 6 से 14 वर्ष के प्रत्येक बालक बालिका को औपचारिक या अनौपचारिक तरीके से अनिवार्य रूप से शिक्षित करने एवं 15 से 35 वर्ष के प्रत्येक स्त्री और पुरुष को साक्षर करने का लक्ष्य रखा गया । शिक्षा के इस लक्ष्य को प्राप्ति में जन-सहभागिता एवं स्थानीय सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश को महत्व दिया गया । 1998 तक हम देश के करीब 6 लाख प्राथमिक विद्यालय, 2 लाख उच्च प्राथमिक विद्यालय, 1 लाख हायर सेकंडरी विद्यालय 6000 कॉलेज 225 विश्वविद्यालय, 155 मेडिकल कॉलेज तथा 1230 इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी कॉलेज स्थापित कर चुके हैं । 1951 में साक्षरता की दर 18% थी जो अब लगभग 65.38% से अधिक पहुंच गई है । वर्तमान में भारत तीसरी सबसे बड़ी शिक्षा प्रणालीवाला देश है । प्राथमिक शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाकर हमने दीर्घ प्रलंबित आवश्यकता को पूरा किया है ।

स्वास्थ्य : आजाद भारत : New Hindi Essay

स्वास्थ्य की दृष्टि से भी पिछली आधी शताब्दी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है । जहां जन्म दर 43 से घटकर 26 प्रति हजार हो गई है, वहीं मृत्यु दर भी 23 से घटकर 9 प्रति हजार रह गई है । परिवार नियोजन के द्वारा लगभग 14 करोड बच्चों ने कम जन्म लिया है । चेचक की बीमारी लगभग खत्म हो चुकी है और पोलियो समाप्त होने की ओर है तथा कुष्ठ लोगों को भी मिटाने में लगे हुए हैं । मलेरिया का प्रभाव भी सीमित किया गया है । देश में केन्सर, हृदय रोग तथा अन्य घातक बीमारियों के इलाज हो रहे हैं । देश के नागरिकों की औसत आयु दर 1950 में 32 वर्ष की तुलना में अब लगभग 64 वर्ष से भी अधिक हो चुकी है । देश में लगभग 165 मेडिकल कॉलेजों में प्रत्यय 17 हजार चिकित्सक तैयार हो रहे हैं तथा 1951 में जहांँ 1 लाख व्यक्ति प्रति 32 शैय्याएँ थीं, वहीं 1998 में 70 से अधिक हो गई हैं । इसी प्रकार देश के स्वास्थ्य में वृद्धि हुई है । देश की 85% से अधिक जनसंख्या को स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध करवा सके हैं । भारत सरकार ने सन 2000 तक सबके लिए स्वास्थ्य की वचन बद्धता घोषित की है । जनसंख्या को नियंत्रित रखना हमारी प्राथमिकता है और हमने इस क्षेत्र में काफी राशि का वह भी किया है किंतु अपेक्षित जन जागरण के अभाव में हम अभी जनसंख्या वृद्धि दर को कुछ ही कम कर सके हैं ।

आजाद भारत : New Hindi Essay

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अधिसूचना के अन्य क्षेत्र : आजाद भारत : New Hindi Essay

सुरक्षा की दृष्टि में थल सेना, नौ सेना, वायु सेना के सुरक्षात्मक एवं गुणात्मक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है । जनसंचार के क्षेत्र में अखबार, पुस्तकें, रेडिओ, टेलीविजन, बेतार टेलीफोन आदि में तेजी से विकास हुआ है । भारतीय रेलों, सड़क, जहाजरानी क्षेत्र में कई गुना वृद्धि हुई है तथा परिवहन के सभी साधनों में तकनीकी दृष्टि से सुधार हुआ है । भारत की रेल विश्व की 3 सबसे बड़ी रेल सेवाओं में से एक है । पर्यटन में जहांँ 1951 में केवल 71 हजार पर्यटक आते थे वहां 2004 में 20 लाख से ऊपर पर्यटक आने लगे है, इस प्रकार पर्यटन से 800 करोड़ रुपये से अधिक आए हो होने लगी है ।

लोकतांत्रिक समाज का निर्माण : आजाद भारत : New Hindi Essay

आजादी के बाद राजनीतिक संस्थाओं में अनेक उतार-चढ़ावों के बावजूद हमारी लोकतंत्रात्मक शासन प्रणाली के अक्षुण्ण रख सके हैं । हमने 1950 में एक उत्कृष्ट संविधान अपनाया है जिसमें समता, स्वतंत्रता, धर्म-निरपेक्षता, सामाजिक न्याय जैसे आधारभूत लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठा की है । हमने 73वाँ 74वांँ संविधान संशोधन करके ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय निकायों को मजबूती देकर सत्ता का विकेंद्रीकरण किया है, उनमें अनुसूचित जाति, जनजाति एवं एक तिहाई महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य करके विश्व में लोकतंत्र की विशिष्टता स्थापित कि हैं । संसद में भी एक तिहाई महिलाओं की सदस्यता का विधेयक विचाराधीन है जो विश्व में अग्रणी कदम है । छुआछूत, जाति व्यवस्था को भी हमने काफी शिथिल किया है । भारत की न्यायपालिका और सेना ने भी अपने दायित्व का निर्विवाद उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है ।

हमारे विकास के छिद्र : आजाद भारत : New Hindi Essay

उपयुक्त विवरण से यह स्पष्ट है कि भारत में चहुंमुखी विकास किया है; किंतु हमारी शुद्ध राजनीतिक इच्छा के अभाव के कारण, नौकरशाही को लोकतंत्र के अनुरूप नहीं ढाल पाने के कारण तथा गरीबी एवं अमीर की खाई के बढ़ते जाने के कारण देश में अनेक तरह की समस्याएं भी पैदा हुई है । जहांँ एक ओर जनसंख्या की वृद्धि के कारण बेरोज़गारों की संख्या में वृद्धि हुई, वही हम सब लोगों को साक्षर नहीं बना सके । सभी लोगों के जीवनयापन के लिए पर्याप्त सुविधाएं मौजूद नहीं है, उदारीकरण के फलस्वरुप चंद उद्योगों को तो चमक प्राप्त हुई है किंतु व्यापक स्तर पर उद्योग बंद हो रहे हैं या घाटे में चल रहे हैं । संपन्न वर्ग के पास तो व्यय करने की क्षमता है किंतु आम आदमी की क्रय क्षमता बहुत कम है । इसलिए अभी भी देश में लगभग 26% लोग गरीबी की रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं । हमारे तमाम प्रयत्नों के बावजूद हम लगभग 35% लोगों को निरक्षर और गरीबी से भी बदतर हालत में 21वीं शताब्दी में ले आए हैं एक ओर महंगाई बढ़ती जा रही है, दूसरी ओर उद्योगों तथा बाजारों में मंदी छा रही है । इस प्रकार देश का आर्थिक ढांचा आर्थिक विषमता के कारण असंतुलित होता जा रहा है । ‘मानव विकास रिपोर्ट 2003’ के अनुसार ‘मानव विकास निर्देशांक’ की दृष्टि से भारत 174 देशों की सूची में 127वें स्थान पर है । इसी रिपोर्ट के अनुसार विश्व में सर्वाधिक निर्धन, कुपोषित एवं निरीक्षण लोग भारत में रहते हैं । 78 विकासशील देशों की तालिका 36.7% जनसंख्या, जो कि गरीबी रेखा से नीचे रहती है, को लेकर भारत 47वें स्थान पर हैं ।
समकालीन भारत में गांँवों से शहरों की ओर पलायन से हमारे शहर आवास एवं प्रदूषण की समस्याओं से ग्रस्त हैं । संयुक्त परिवार के टूटने के साथ एकल परिवार बढ़ते जा रहे हैं और उनमें भी टूटन की समस्याएँ तेजी से बढ़ती जा रही हैं । समाज में जाति एवं संप्रदाय को लेकर समय-समय पर द्वेष उठता रहता है । आतंकवाद ने अनेक प्रदेशों को चपेट में ले रखा है । हम अपनी संस्कृति पर बिना विचार पुनर्विचार की पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण से ग्रस्त हैं । व्यक्ति एवं क्षेत्र के आधार पर विकास असंतुलित होता जा रहा है । आर्थिक उदारवाद एवं वैश्वीकरण को हमने जिस निर्बाध तरीके से अपनाया है, उससे हम ‘नव उपनिवेशवाद’ और ‘नव साम्राज्यवाद’ की गिरफ्त में फंँसते जा रहे हैं तथा अब तक हमने जिस से स्वावलंबी अर्थव्यवस्था को जैसे-तैसे खड़ा किया था उसी की नीवें खोदने की ओर अग्रसर हैं ।

हमारी चुनौतियांँ : आजाद भारत : New Hindi Essay

यदि हमें देश को गौरवशाली ढंग से इक्कीसवीं शताब्दी में विकसित करना है तो हमें राजनीति और प्रशासन में छाए अधिनायकवाद एवं भ्रष्टाचार को दूर करना होगा, अपने देश की शक्तियों और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था का पुनर्गठन करना होगा, सीखने-सिखाने के नए तरीकों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा तथा आर्थिक दृष्टि से विदेशों पर निर्भर रहने की बजाय स्वावलंबी अर्थव्यवस्था को खड़ा करना होगा । परमाणु विस्फोटों के बाद भारत विकसित देशों की नजर में खटकने लगा है इसलिए आजादी से अब तक कि हमारी संतोषजनक उपलब्धियों के बावजूद हमें कमर कसकर, अपने बूते पर देश के हर क्षेत्र में पुनर्जागरण का अभियान छेड़ना होगा तभी हम आजादी को सुरक्षित रख सकेंगे ।

हमारा लक्ष्य : दूसरी आजादी : आजाद भारत : New Hindi Essay

भारत में भौतिक संसाधनों एवं मानव शक्ति की पर्याप्तता है किंतु इसका उपयोग पश्चिम के आर्थिक ढांँचे पर नहीं बल्कि भारतीय स्थितियों के अनुरूप बनने वाले स्वावलम्बी एवं सबका विकास कर सकने वाले ढांँचे को बनाने के लिए करना है । देश पर पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के दबाव बढ़ रहे हैं । वे अपनी तकनीक और उत्पादों को भारत के बाजार में बेचने के लिए लालायित हैं । आज पहले तो हमारी आर्थिक आजादी को और उसके बाद राजनीतिक आजादी को खतरा है । अंत: हमें सचेत होकर, भारतीय हितों को ध्यान में रखते हुए एवं अविकसित तथा विकासशील देशों के हितों का नेतृत्व करते हुए तथा विकसित देशों के शोषण-जाल से बचते हुए विश्व अर्थव्यवस्था के साथ तालमेल रखना है । अब न केवल राजनीतिक आजादी के बराबर रखने के लिए बल्कि हमारी ‘दूसरी आजादी’-सामाजिक व आर्थिक आजादी एवं समता को प्राप्त करने के लिए भी कड़ा संघर्ष करना है ।

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Written by lokhindi
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