Motivational Story in Hindi – ममता – New Story

Motivational Story in Hindi – ममता

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वह एक छोटा-सा कस्बा था । हर और शांति व प्रेम का वातावरण था । हर आदमी अपने काम में व्यस्त था । औरतें घर का काम कर रही थी, बच्चे इधर-उधर खेल रहे थे, मर्द अपने कामों में निमग्न थे ।

अचानक सभी की निगाह कस्बे के मुख्य चौराहे पर आकर रुकने वाले मिलिट्री ट्रक की ओर उठ गयीं ।

अगले ही पल ट्रक के पिछले हिस्से का दरवाजा खुला और दो सिपाही नीचे उतरे । उन्होंने आस-पास का निरीक्षण किया ।

सभी लोगों की निगाहें उन पर टिकी थी ।

दोनों एक लोहार के पास जाकर खड़े हो गये ।

लुहार उन्हें देखते ही अपना स्थान छोड़कर खड़ा हो गया ।

एक सिपाही ने पूछा – “लाखन सिपाही का मकान कौन-सा है ?”

“जी !” लोहार सोच में पड़ गया ।

“लाखन सिपाही का मकान ?” सिपाही ने पुनः पूछा ।

“वो बोला !” लोहार ने एक मकान की तरफ उंगली उठा दी ।

“धन्यवाद !” सिपाही ने कहा और लाखन सिपाही के मकान की ओर चल दिये ।

इधर, सिपाहियों के लुहार के पास से हटते ही कुछ आदमी लुहार के पास आकर खड़े हो गये ।

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एक ने पूछा – “क्या बात है भैया, ये सिपाही क्या पूछ रही थे तुमसे ?”

लुहार ने कहा – “बात तो मालूम नहीं, मगर यह लाखन सिपाही के मकान का पता पूछ रहे थे…।”

“क्यों ?” दूसरे ने पूछा ।

“पता नहीं ।” लुहार ने अनभिज्ञता दिखाई ।

”अरे, लाखन भी तो सिपाही है, हो सकता है मिलने मिलाने आए हो ।”  किसी ने राय दी ।

“हां, यह भी हो सकता है ।” लोहार ने स्वीकारा ।

तभी,

सभी की निगाहें लाखन के मकान की खुले दरवाजे पर जा टिक्की । उन्होंने देखा कि खुले दरवाजे से वही दोनों सिपाही लाखन की बीवी को साथ लेकर बाहर आ रहे हैं ।

” मामला क्या है भैया ?”  किसी ने लुहार से पूछा ।

” मुझे क्या मालूम ?” लुहार ने कहा और उन्हीं सिपाहियों व लाखन की पत्नी की और देखने लगा ।

अचानक उसे कुछ ध्यान आया । वह वहां खड़े लोगों से बोला – “भाइयों, सरहद पर लड़ाई भी तो चल रही है और  अपना लाखन भी लड़ाई पर गया हुआ है ।”

” तो ।” किसी ने पूछा ।

” तो…।” कहते-कहते लोहार एक पल को रुका, फिर हिचकीचाते हुए बोला – “कहीं अपना लाखन…।”  इससे आगे कुछ नहीं कह सका ।

इस बार कोई कुछ नहीं बोला । हालांकि सभी ने लुहार की बात का मौन समर्थन किया था ।

और इधर !

दोनों से सिपाही लाखन की पत्नी को लेकर मिलिट्री ट्रक के पिछले हिस्से पर पहुंचे ।

लाखन की पत्नी कुछ दूरी पर खड़ी रही ।

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दोनों सिपाहियों ने ट्रक के समीप जाकर कुछ फुसफुसाया और अगले पल ट्रक के अंदर से कुछ और सिपाही बाहर आए ।

इस बीच कुछ औरतें धीरे – धीरे मक्खियों की तरह लाखन की पत्नी के आसपास भिनभिनाने लगीं ।

जबकि इधर, कुछ सिपाहियों ने ट्रक से एक लंबा चौड़ा बक्शा निकाल लिया और उसे ट्रक के नीचे रख एक स्ट्रेक्चर पर रख दिया ।

किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उनसे पूछ सके कि इस बक्से में क्या था ।

तभी, सभी सिपाहियों का स्टेचर को उठाकर लाखन के घर की ओर चल दिये । उसके घर के सामने एक चारपाई पड़ी थी ।

सिपाहियों ने स्ट्रेचर पर पर रखे बक्से के ढक्कन को खोला ।

सभी के दिल धाड़-धाड़ बजने लगे ।

लाखन की पत्नी अपने घर के सामने पड़ी चारपाई के पाईतियों में खड़ी हो गयी ।

इधर कुछ सिपाहियों ने बक्से में रखें एक इंसानी जिस्म को बाहर निकाला और चारपाई पर रख दिया ।

सभी ने देखा की इस इंसानी जिस्म में कोई हलचल नहीं थी । सांसे जैसे उसने कभी थी ही नहीं ! शरीर की रंगत हल्दी की मानिंद पीली पड़ चुकी थी ।

लेकिन !

फिर भी उसके चेहरे से लगता था कि वह धीरे-धीरे मुस्कान रहा है, जैसे उसे कोई गम, कोई शिकवा नहीं है ।

किंतु,

यह बात बस महसूस की जा सकती थी, हकीकत यह नहीं थी ।

हकीकत यह थी कि वह इंसानी जिस्म मृत था ।

“य…ह…यह तो अपना लाखन है ।” किसी वृद्ध के मुह से निकला ।

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लेकिन कोई बोलता, इससे पहले ही एक स्त्री की आवाज बुलंद हुई – “हां काका ! ये तुम्हारा लाखन है, लाखन सिपाही ! मरा हुआ लाखन सिपाही काका ! मरा हुआ.. हां काका – यह मर गया काका, ये मर गया, यह मर गया काका ।” लाखन सिंह की पत्नी थी यह ।

सभी की निगाहें उसके चेहरे पर जा टिकी । किंतु अगले पल सब हैरान रह गये ।

सभी ने देखा लाखन की पत्नी धीर-धीरे उसक रही थी और फिर – उसका चेहरा एकदम से कड़ा हो गया ।

पति का मृत शरीर सामने पड़ा था और लाखन की पत्नी गौर से देख जा रही थी, पत्थर की मूरत की तरह !

आसूं नाम के लिए भी उसकी आंखें मैं नहीं थे ।

उसकी हरकत देखकर सभी लोग शंकित से हो गये ।

एक बार पुनः उसी बुड्ढे की आवाज आई – “अरे, कोई इसे रुलाओ- वरना ये सदमे से मर जाएगी ।

बुड्ढे की आवाज जैसे सभी के शरीरों में ऊर्जा का संचार कर गयी । सभी एक साथ हरकत में आए ।

और फिर !

कोशिश शुरू की हुई की लाखन की पत्नी को रुलाया जाए, वरना वह सदमे में मर जाएगी ।

सबने अलग-अलग कोशिश की ।

सबने अलग-अलग तरीके अपनाएं कि लखन की पत्नी रोने लगे ।

किंतु !

यह देखकर भी सभी हैरान हुए की कोई भी तरकीब…उपाय कारगर सिद्ध नहीं हुआ ।

किसी की समझ मैंने आ रहा था कि क्या करें ?

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उस नारी के अंदर कि तूफान को बाहर लाने के लिए कोई भी तरकीब ना चल सकी थी । यहां तक कि लोगों ने उसे रुलाने के लिए उसके पति की कहानी किस्से व पुरानी यादें उसके सामने ताजा किये । किंतु वह पत्थर की मूर्त की तरह खड़ी अपने पति के शरीर को निहारती रही ।

उसका चेहरा देखने से ऐसा प्रतीत होता था जैसे आज कोई तूफान आने वाला है । आज प्रलय इस धरती पर कदम रखने वाली है ।

हालांकि उसे एक चमत्कार ही कहा जा सकता है कि अचानक वहां पर लखन का इकलौता बेटा खेलता हुआ आ गया ।

जैसे इसकी निगाहें अपने बाप के चेहरे से टकराई, वह एक खुशी से लबरेज चीख चीख उठा ।

वह दौड़कर अपने बाप के शरीर से लिपट गया और पापा-पापा कहकर खुशी जाहिर करने लगा ।

किंतु,

जब काफी देर तक उसका बाप नहीं उठा तो रोता अपनी मां से जा लिपटा ।

और बस,

यही वो चमत्कारी घड़ी साबित हुई जब लाखन की पत्नी की आंखों से आंसूओं की अविरल धारा फूट निकली ।

वह बोली – “मेरे बच्चे ! मेरे लाल !  तेरी खातिर ही तो मुझे जिंदा रहना पड़ रहा है…।”

इस प्रकार मां की ममता के इतिहास में एक और अध्याय का जन्म हुआ । और लखन ने अपनी शहादत से उस कस्बे का नाम रोशन कर दिया । आज वह कस्बा वीरगति प्राप्त लाखन के नाम से याद किया जाता है । क्योंकि लाखन ने अपने देश की सीमा की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी, मगर के दुश्मन देश के सिपाहियों को भारत सीमा से इंच भी आगे बढ़ने दिया ।

शिक्षा – “ सच्चा सिपाही वही जो मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दे । सच्ची नारी वही जो अपनी ममता के आंचल से अपनी औलाद के सुखों की रक्षा में जी जान से जुट जाए ।”

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Written by lokhindi
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