अपना पुरुषार्थ – Motivational Story Hindi – हिंदी कहानी

Motivational Story Hindi

आगरा नगर में धर्मचंद नामक एक व्यापारी रहता था | उसका व्यापार बहुत अच्छा चल रहा था | अरबों की संपत्ति थी, बहुत बड़ी हवेली थी | नौकर-चाकर थे, पत्नी-बच्चे परिवार सभी कुछ था | किंतु फिर भी सेठ को शांति नहीं थी | उसका मन कभी खुश नहीं रहता था | हर समय एक अजीब सी बेचैनी रहती थी | व्यापारी ने अनेक लोगों से इसका कारण पूछा; किंतु कोई भी ठीक से कुछ नहीं बता पाया |

एक दिन किसी ने उसे बताया कि नगर के बाहर एक जंगल में किसी साधु ने अपना आश्रम बनाया है | वह लोगों को ऐसी सिद्धि देता है; कि उन्हें मनचाही वस्तु मिल जाती है |

व्यापारी ने सोचा कि क्यों न वह भी एक बार उस साधु बाबा से मिल लें | अतः वह उस साधु के पास गया | साधु उस समय साधना में लीन थे | व्यापारी उन्हें प्रणाम करके उनके पास बैठ गया | कुछ देर बाद साधु ने आंख खोली और उस व्यापारी से उसके आने का कारण पूछा व्यापारी बोला – ” महाराज ! मेरे पास किसी चीज की कोई भी कमी नहीं है | रुपया-पैसा परिवार आदि सब कुछ है | किंतु फिर भी मेरे मन में शांति नहीं है | आप कुछ ऐसा उपाय बता दीजिए | जिससे मेरे मन की अशांति दूर हो सके |”

साधु बोले – ” तुम्हें कुछ दिन यहां रहना होगा | व्यापारी ने सोचा था कि साधु उसे कोई मंत्र या कोई ताबीज देंगे; किंतु वह तो उससे वहां रहने को कह रहे थे | फिर भी कुछ सोचकर वह राजी हो गया |

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अगले दिन साधु ने व्यापारी को सारा दिन धूप में बिठाए रखा और स्वयं अपनी कुटिया के अंदर छाया में जाकर चैन से बैठे रहे |

गर्मी के दिन थे | पसीना तथा गर्मी से व्यापारी का बुरा हाल था | उसको गुस्सा तो बहुत आया किंतु वह चुपचाप इसे पी गया |

दूसरे दिन साधू सेठ से बोला – ” आज तुम्हें दिनभर कुछ भी खाने को नहीं मिलेगा |”

साधु की बात सुनकर सेठ अवाक़ रह गया; किंतु बोला कुछ नहीं सारा दिन खाने को कुछ नहीं मिला | भूख के मारे उसके पेट में चूहे -कूदते रहे | उसने देखा कि साधु तरह तरह के पकवान उसी के सामने बैठकर बड़े ही आनंद से खा रहा है |

व्यापारी सारी रात परेशान रहा | उसे एक क्षण भी नींद नहीं आई | वह सोचता रहा कि ” वह तो अपने दु:ख दूर करने यहां आया था| किंतु; यहां तो उसे और अधिक दु:ख मिल रहे हैं | यह साधु तो बड़ा स्वार्थी है | वह सुबह यहां से चला जाएगा |”

तीसरे दिन सुबह ही उठ कर उसने अपना बिस्तर बांधा और चलने को तैयार हो गया | तभी साधु उसके सामने आ खड़े हुए और उससे बोले – ” क्यों सेठ ! क्या हुआ तुम्हें तो कुछ दिन यहां रहना था |”

व्यापारी बोला – ” बाबा ! मैं तो बड़ी आशा के साथ आपके पास आया था | लेकिन मुझे यहां कुछ नहीं मिला | उल्टे ऐसी मुसीबतें उठानी पड़ी | जो मैंने जीवन में कभी नहीं उठाई | मैं जा रहा हूं |”

साधु हंसकर बोला – ” मैंने तुझे इतना कुछ दिया, लेकिन तूने तो कुछ भी नहीं लिया |”

व्यापारी ने विस्मय भाव से कहा – ” लेकिन आपने तो मुझे कुछ नहीं दिया |”

साधु बोले – ” सेठ पहले दिन जब मैंने तुझे धूप में बिठाया और सवयं छाया में बैठा तो, इसके द्वारा मैंने तुझे बतलाया कि मेरी छाया तेरे काम नहीं आ सकती | जब मेरी बात तेरी समझ में नहीं आई तो दूसरे दिन मैंने तुझे भूखा रखा और सवयं खूब अच्छी तरह से खाना खाया | उससे मैंने तुझे समझाया कि मेरे खा लेने से तेरा पेट नहीं भर सकता | सेठ याद रख मेरी साधना से तुझे सिद्धि नहीं मिलेगी | धन तूने अपने स्वार्थ से कमाया है | शांति भी तुझे अपने ही पुरुषार्थ से मिलेगी |”

साधु की बात सुनकर व्यापारी की आंख खुल गई | उसे अपने सुख की मंजिल नजर आ गई | वह साधु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हुआ घर लौट आया |

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Written by lokhindi
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