Moral Stories in Hindi – महापापी – Hindi Moral Stories

Moral Stories in Hindi – महापापी

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बात भगवान महावीर के समय की है | भगवान महावीर एक नगर में उपदेश दे रहे थे |

तभी उनके दर्शन के लिए एक राजा व देव आया |

उसके पीछे कसाई और भ्रत्य आया |

भगवान उपदेश देने लगे |

अचानक भगवान महावीर को छींक आ गयी |

देव बोला – “ शीघ्र मरियस्व |” – अर्थात जल्दी मरो |

राजा को देव की यह बात अच्छी नहीं लगी |

थोड़ी देर के बाद स्वयं राजा को छींक आ गयी |

देव बोला – “ चिरंजीव |” – अर्थात बहुत दिन जिओ |

यह सुनकर राजा हैरान हो गया |

किंतु,

उसने फिर से अपना ध्यान भगवान महावीर का उपदेश सुनने में लगा दिया |

तभी !

भ्रत्य को छींक आ गयी |

देव ने कहा  – “ जीव या मरियस्व |” – अर्थात जियो या मरो |

राजा ने पुन: देव की ओर देखा और पुन: भगवान के उपदेश में ध्यान लगा दिया |

तभी संयोगवश कसाई को छींक आ गयी |

देव बोला – “ न जीव, न मरियस्व |” – अर्थात न जियो, न मरो |

यह सुनते ही राजा का दिमाग घूम गया |

इसी बीच भगवान महावीर ने उपदेश समाप्त कर दिया |

तब देव उनसे विदा लेकर चला गया |

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इसके बाद राजा ने भगवान महावीर से पूछा – “ प्रभु ! यह सब क्या था |”

भगवान महावीर ने मुस्कुराकर पूछा – “ क्या हुआ ? राजन |”

राजा ने अपनी जिज्ञासा महावीर के सम्मुख रख दी |

भगवान महावीर ने कहा – “ राजन ! उसने जो कहा, ठीक ही कहा |”

“ वह कैसे प्रभु ” राजा ने पूछा |

महावीर ने बताया – “ राजन ! जब मुझे छींक आयी, तो उसने कहा मेरा मरना अच्छा है क्योंकि जब तक मेरा यह शरीर मुझसे अलग नहीं होगा | मेरी मुक्ति संभव नहीं है |”

राजा ने पूछा – “ भगवान ! मुझे जीने को क्यों कहा |”

भगवान महावीर ने उत्तर दिया – “ उसके कहने का अर्थ यह था, कि मरने के बाद तुम नर्क जाओगे | अत: जितना जी सको, जी लो |”

“ और भ्रत्य के लिए जियो या, मरो का अर्थ क्या था?” भगवान |

“ इसलिए कि वह धार्मिक व्यक्ति है, वह जब तक जीवित रहेगा | तब तक धर्म का आचरण करेगा और मृत्यु के बाद वह स्वर्ग जायेगा | अत: वह जीवित रहता है तो मानव जाति के लिए अच्छा और यदि मरता है, तो वह स्वयं के लिए अच्छा है | यानी उसका जीना-मरना एक बराबर है |”

यह जानकर राजा ने कसाई के विषय में अपनी जिज्ञासा प्रकट की |

भगवान महावीर ने कहा – “ उसके लिए देव ने जो कहा उसका तात्पर्य यह था कि, वह महापापी है | वह जब तक जीवित रहेगा | तब तक पाप करता रहेगा और मरने पर नर्क में जायेगा | उसका न जीना शुभ है, और न ही मरना शुभ है | क्योंकि यदि वह जीवित रहता है तो मानव हित के लिए अशुभ है, और यदि मरता है तो  स्वयं के लिये |”

भगवान महावीर की बात सुनकर राजा समझ गया, कि यह सब बातें समाज के प्रतिनिधियों के लिये है | वे संपूर्ण मनुष्य जाति पर लागू होती है |”

शिक्षा – “ इस नश्वर संसार में उसी का जीना शुभ और कल्याणकारी है | जिसके जीने से दूसरों को सुख पहुंचता हो |  पापियों का जीना-मरना एक समान है | उनके दीर्घायु की कामना भी नहीं करनी चाहिये |”

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Written by lokhindi
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