बंजारन की शादी Love Story – Cheating Love Story Hindi

बंजारन की शादी Love Story

किस्सा तोता-मैना/बंजारन की शादी Love Story की रोचक दास्तान हिंदी में ! Cheating Love Stories in Hindi-Sad Story in Hindi


एक महानगर में जसवंत सिंह नाम का युवक रहता था। वह बड़ा सुन्दर और रूपवान था। एक बार जसवंत सिंह अपनी ससुराल जा रहा था। जब वह शहर से दो-चार मील आगे निकल गया तो रास्ते में उसको बहुत तेज प्यास लगने लगी। उस समय वह प्यास का मारा एक गांव में पहुंचा।

वहां उसने देखा कि एक बंजारे की लड़की जिसका रूप चन्द्रमा के समान, नैन मृग के समान और शरीर यौवन से भरपूर था, वह अपने मकान के दरवाजे पर खड़ी थी।

प्यास की अधिकता के कारण वह ज्यादा देर वहां खड़ा नहीं रह सका। उसे अपनी आंखों के सामने सारा भूमण्डल घूमता हुआ प्रतीत होने लगा और कुछ ही पल में वह लड़खड़ाकर गिर गया और बेहोश हो गया।

जसवंत सिंह को बेहोश होकर गिरते देखकर आस-पास के बहुत से लोग वहां जमा हो गए और उसके मुंह पर पानी के छींटे डालकर उसको होश में लाने का यत्न करने लगे। थोड़ी देर बाद जसवंत सिंह को होश आया। उसको घेर कर खड़ी भीड़ में से एक युवक ने पूछा-”ठाकुर साहब! आपको यह क्या हो गया?” लोगों की यह बात सुनकर वह जोर से आहे भरने लगा और शायरी का शौक रखने वाला जसवंत शेर पढने लगा। वहां जमा लोगों ने देखा कि वह सामने खड़ी बंजारे की लड़की पर फिदा हो गया है।

“लोग उसे समझाने लगे–“ठाकुर साहब! जरा होश में आओ। आप राजपूत हैं और वह नीच कुल की है। आपको उससे दिल नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि ये हुस्नो-जवानी चार दिन की मेहमान है।”

लोगों की बातें सुनकर आह भरते हुए जसवंत सिंह बोला_“ऐ लोगो! मुझे दीन ईमान से कुछ काम नहीं है। जब तक यह चांद से मुखड़े वाली मेरे साथ ब्याही न जाएगी तब तक मैं अपना जीना मुश्किल समझता हूं। आप लोग मेहरबानी करके इस रूपसी के मां-बाप से कह दो कि एक बेचारा, मुसीबत का मारा तुम्हारी बेटी के नैनों से घायल तड़प रहा है, या तो उसके साथ अपनी बेटी की शादी कर दें, नहीं तो वह तुम्हारे दरवाजे पर सिर पटक-पटक कर मर जाएगा।”

जसवंत सिंह की बातें सुन कर कुछ आदेसियों ने जाकर सारा हाल उस बंजारे से कहा, बंजारा उसी समय जसवंत सिंह के पास आया और बोला–“ठाकुर साहब! जरा सोच समझकर बात करें, क्योंकि आप जात के राजपूत हैं और मैं बंजारा हूं।”

आपके साथ मेरी बेटी की शादी किस तरह हो सकती है? और यदि आप मेरी बेटी से शादी करेंगे तो भी आपको क्या फायदा होगा? क्योंकि हमारा पेशा तो इधर-उधर घूमते रहने का है और अगर आप मेरी लड़की से शादी करेंगे तो आप को भी ये काम करना पड़ेगा और आप अपनी जात बिरादरी में किसी काम के नहीं रहेंगे।”

बंजारे ने जसवंत सिंह को हर तरह से ऊंच-नीच की बातें समझाईं, लेकिन जसवंत सिंह की समझ में कुछ नहीं आया। आखिरकार मजबूर होकर उस बंजारे ने अपनी लड़की का ब्याह जसवंत सिंह के साथ कर दिया। विवाह के बाद जसवंत सिंह और बंजारे की लड़की में इतना प्रेम बढ़ा कि जसवंत सिंह को उस लड़की के सिवा दुनिया में कुछ नजर नहीं आता था। इसी तरह ऐशो आराम की जिन्दगी के कुछ दिन गुजर गए।

एक दिन जसवंत सिंह को अपने घर की याद आयी, वह अपनी पत्नी से कहने लगा–“अब मेरा दिल अपने घर जाने को चाहता है। अगर तुम्हारे मां-बाप आज्ञा दें तो उनसे कहो कि तुम्हारी विदाई कर दें।”

“मुझे कोई एतराज नहीं है, क्योंकि मैं तो आपकी आज्ञा का पालन करना अपना धर्म समझती हूं।” बंजारे की लड़की ने कहा।

लड़की ने अपने माँ-बाप को सारा हाल कह सनाया। उन्होंने खुशी-खुशी बेटी और दामाद को ढेर सारा सामान देकर विदा किया। कई दिनों के सफर के बाद जब उसका घर कुछ मील दूर रह गया तब जसवन्त सिंह ने सोचा कि “मैंने बहुत बुरा किया जो जरा-सी सुन्दरता देखकर अपने धर्म को खो बैठा। मेरे माता-पिता को जब मालूम होगा कि मेरी पत्नी एक बन्जारन है तो वो मुझसे क्या कहेंगे? अच्छा रहेगा कि इसको कत्ल करके यहीं किसी कुएं में डाल दूँ। यह बात दिल में सोचकर, रात के समय जब वह लड़की सो गई तो जसवंत सिंह ने उसे छुरी से घायल करके कुएं में डाल दिया और सारा जेवर व सामान लेकर अपने घर की ओर चल पड़ा। जब वह अपने घर पहुंचा तो उसके मां-बाप ने पूछा-“बेटे इतने दिन तू कहा रहा? हमें तो तेरी काफी चिन्ता होने लगी थी।”

“मुझे रास्ते में एक अमीर आदमी ने नौकर रख लिया था। अब मैं उससे आज्ञा लेकर आया हूं।” जसवंत सिंह ने कहा।

बेटे की यह बात सुनकर मां-बाप बहुत खुश हुए।

बंजारन की शादी Love Story in Hindi

मैना बोली- ”ऐ तोते! अब मैं यहां की दास्तान बन्द करके उस औरत का हाल कहती हूं—जब जसवंत सिंह उस औरत को मारकर कुएं में डाल गया, तब ईश्वर की कृपा से पानी की ठंडक पाकर उस औरत का होश आ गया और उसने कुँए की जंजीर पकड़ ली।

इत्तफाक से एक पथिक पानी पीने के लिए वहां आ गया। उसने जैसे ही कुँए में डोल डाला, वैसे ही उस स्त्री ने डोल पकड़ लिया और चिल्लाने लगी-बचाओ…मेरी रक्षा करो।”

‘‘तू कौन है?” पथिक ने पूछा।

“ऐ पथिक! मैं मुसीबत की मारी एक अबला हूं। मुझे इस कुएं से निकालकर मेरी जान बचाओ।” बंजारन ने प्रार्थना भरे स्वर में कहा।

यह सुनकर उस पथिक ने औरत को कुएं से निकाला और पूछा- “तू कौन है और तेरा यह हाल कैसे हुआ?”

“मैं और मेरा पति अपने घर जा रहे थे। अचानक डाकुओं ने हमें घेरकर हमारा माल व सामान लूट लिया तथा मुझे घायल करके इस कुएं में डाल गए।” उस औरत ने बताया।

यह सुनकर पथिक को उस पर बड़ी दया आयी। उस पथिक ने रास्ते की कई विपत्तियां सहकर उस लड़की को उसके मां-बाप के पास पहुंचा दिया। मां-बाप ने जब अपनी भूखी-प्यासी घायल बेटी को देखा तो बहुत परेशान हुए और बेटी को सीने से लगाकर उन्होंने पूछा “बेटी! तेरा यह हाल कैसे हुआ? हमें बता।”

उस पतिव्रता स्त्री ने अपने पति के कमीनेपन को छुपाकर अपने मां-बाप से कहा- “रास्ते में डाकुओं ने हमला करके सारा माल लूट लिया और मुझे जख्मी करके कुएं में डालकर भाग गए। मेरे पति का क्या हुआ, मुझे कुछ मालूम नहीं।”

यह बात सुनकर उसके बाप ने समझाया- “बेटी! ईश्वर को याद कर और उसे धन्यवाद दे जिसने तेरी जान बचाई, वही तेरे पति को भी तुझसे मिला देगा।”

थोड़े ही दिनों में भगवान की कृपा से वह औरत बिल्कुल भली चंगी हो गयी।

मैना बोली- ‘‘ऐ तोते! यहां की बात, यहीं छोड़कर अब थोड़ी सी उस बेईमान की बात सुनाती हूं जब जसवंत सिंह को वापिस आए हुए दो-चार महीने हो गए और वह सारा माल बेचकर खा गया, खर्चे की तंगी होने लगी तो वह सोचने लगा- “अब माल खत्म हो गया, मझे उस बंजारे के पास चलना चाहिए और वहां जाकर उससे कहूगों कि तुम्हारी बेटी के लड़का हुआ है तो वह यह शुभ समाचार सुनकर कुछ रुपया पैसा अवश्य ही देगा।”

यह सोचकर वो अपनी ससुराल पहुंच गया तो उसने देख देखा कि झोंपड़ी के बाहर बंजारे की वही लड़की चारपाई पर बैठी है। जब उस लड़की की नजर उस पर पड़ी और दोनों की आंखें मिलीं तो जसवन्त का चेहरा पीला पड़ गया। वह डर कर कांप उठा और सोचने लगा–‘ये बहुत बुरा हुआ, जो मैं यहां आ गया, अब तो इसका बाप मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगा।’ ।

उसे घबराया हुआ देखकर वह लड़की उसके पास आई और बोली- ‘‘बेईमान, निष्ठुर, राजपूत! आज तक मैंने तेरी करतूत को अपने माता-पिता पर या किसी दूसरे पर जाहिर नहीं किया है। मेरे लिए आज भी तू मेरा पति परमेश्वर है, तू अपने दिल में जो चाहे समझ।”

“बंजारे की लड़की की ये बातें सुनकर जसवन्त सिंह बहुत शर्मिन्दा हुआ। वह अपनी स्त्री से कहने लगा-“जो कुछ हुआ उसके लिए मुझे माफ कर दो।”

“अच्छा, भीतर चलो।” बंजारे की लड़की ने कहा।

उसकी बात मानकर जब जसवन्त सिंह अन्दर आया तो सास-ससुर ने उसे सीने से लगा लिया और कहने लगे “धन्य है परमात्मा, जिसने इतने दिनों के बाद तेरी सूरत दिखाई।”

उन्होंने जसवन्त से और भी बहुत सी बातें कीं और उसका बड़ा मान-सम्मान किया। जब इसी तरह ऐशो आराम में कुछ दिन गुजर गए तो जसवन्त सिंह ने अपनी स्त्री से कहा-“अब मेरा दिल यहां नहीं लग रहा है। अब हमें अपने घर चलना चाहिए।’

बंजारे की लड़की ने यह सुनकर उससे कहा–”मुझे तो आपके साथ चलने में कोई ऐतराज नहीं है, मगर सोच लो कि कहीं आप पहले की तरह धोखा तो नहीं देंगे?”

“मैं परमात्मा को हाजिर-नाजिर मानकर कहता हूं कि अब ऐसा कुछ नहीं होगा।” जसवन्त सिंह ने पत्नी की शंका मिटाने का प्रयास करते हुए कहा।

जब उस स्त्री ने अपने मां-बाप से कहा कि मैं अब अपनी ससुराल जाना चाहती हूं तो उन्होंने बहुत सा माल-असबाब देकर बेटी को विदा कर दिया।

जसवन्त सिंह खुशी-खुशी रुखसत होकर चल दिया और जब एक जंगल में पहुंचा तो उसने उस स्त्री को छुरी से घायल करके फिर उस जंगल में फेंक दिया और सारा माल लेकर अपने घर की ओर रवाना हो गया। वह औरत बेचारी छुरी से घायल पड़ी तड़प रही थी कि संयोगवश उसी गांव का एक बंजारा उधर आ निकला। जब उसकी नजर उस औरत पर पड़ी तो उसने उसको पहचान लिया और उससे पूछा– “तेरा यह हाल कैसे हुआ?”

अब उस स्त्री ने सारा हाल उसे सच-सच कह सुनाया। सच्चाई जानकर बंजारे को बहुत दुःख हुआ और उसने दिलासा देकर उसे उसके घर पहुंचा दिया। उसके बाद उस औरत ने मरते दम तक उस बेईमान का नाम भी नहीं लिया।

इतना कहकर मैना तोते से बोली-“तोते, जब से यह दास्तान मैंने सुनी है, तब से मुझे मर्दो का ऐतबार नहीं रहा।”

मैना की बात सुनकर तोता बोला-“ऐ मैना! तू सच कहती है। मगर दुनिया में सब मर्द एक ही जैसे नहीं होते और न ही सारी औरतें एक जैसी होती हैं। दुनिया में सारे मर्द और सारी औरतें एक समान नहीं हैं। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार ईश्वर ने हाथ की पांचों उंगलियां एक समान नहीं बनायी हैं। सो ऐ मैना! तू यह न कह कि औरतें नहीं मर्द ही बेवफा होते हैं। तुम्हारी ये दास्तान सुनकर मुझे भी एक दास्तान याद आ गई है। वह दास्तान मैं तेरे सामने कहता हूं, ध्यान से सुन–

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Written by lokhindi
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