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	<title>MOTIVATIONAL STORIES &#8211; Lok Hindi</title>
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	<title>MOTIVATIONAL STORIES &#8211; Lok Hindi</title>
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		<title>14 Best Business tips in Hindi for Success</title>
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		<pubDate>Sat, 10 Aug 2019 12:30:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>Business Tips in Hindi व्यवसाय के सन्दर्भ में सफलता हेतु कुछ आवश्यक तत्त्व Best 14 Business tips in Hindi for Success and new Ideas for success in business field. विशेषतया व्यवसाय के सन्दर्भ में!  आज के इस वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक समय में किसी व्यवसाय की सफलता (Business success) न केवल बहुत-से साधनों की उपलब्धता पर निर्भर करती है, बल्कि बहुत कुछ मानवीय गुणों, चारित्रिक विशेषता, स्वभाव एवं कुई मनोवैज्ञानिक कारणों पर भी निर्भर करती है। &#8211; इसी पर आधारित कुछ आवश्यक तत्त्व Business tips in Hindi and Business Ideas जो व्यवसाय के सन्दर्भ में सफलता हेतु आवश्यक है। Here are the Best 14 Business tips in hindi that make you successful in your field&#8230; व्यवसाय (Business) की पूर्ण जानकारी: Tips देखा गया है कि कई व्यक्ति लोगों की देखा-देखी, कोई भी व्यवसाय शुरू कर देते हैं, लेकिन वह उस व्यवसाय की आर्थिक उपादेयता (Economic Viability) का सही आकलन नहीं करता है। जो सामान वह बनाने जा रहा है। या जो व्यवसाय वह शुरू कर रहा है, उसकी बिक्री की क्या व्यवस्था, कुशल-अकुशल श्रमिकों की उपलब्धता तथा जिस जगह आप व्यवसाय को शुरू कर रहे हैं, उस व्यवसाय में अन्य कितने लोग संलग्न हैं, इस तरह की विस्तृत जानकारी बिना एकत्र करे यदि कोई व्यक्ति व्यवसाय शुरू करता है, तो उस व्यवसाय की सफलता के बारे में कुछ भी कहना सम्भव नहीं है। यदि किसी क्षेत्र में एक विशेष प्रकार की यूनिट सफल हो गई तो देखा जाता है कि उस क्षेत्र में वैसी ही बहुत सारी यूनिट्स साल-दो साल में लग जाती हैं, जिनमें से एक-दो के अतिरिक्त सभी असफल होकर कुछ वर्षों में बन्द हो जाती हैं। कई बार इस तरह की छोटी-छोटी यूनिट्स के बन्द होने के कारण, एक बड़ी यूनिट का लगना भी होता है, लेकिन आपको इन सब बिन्दुओं पर, यूनिट लगाने से पूर्व विस्तृत रूप से ध्यान देना होगा। किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए, उस क्षेत्र की जितनी अधिक जानकारी आप जुटा सकेंगे, वह आपके हर निर्णय को सही एवं सटीक बनाने में मददगार होगी। व्यवसाय में संलग्न विभिन्न क्षेत्रों में आपस में समन्वय स्थापित करना: सभी व्यक्ति समान नहीं होते हैं। एक व्यक्ति में कुछ गुण होते हैं तो दूसरे व्यक्ति में अन्य प्रकार के गुण होते हैं। कोई व्यक्ति मार्केटिंग में अच्छी दक्षता रखता है तो दूसरा व्यक्ति प्रशासनिक कार्यों में अच्छी पैठ रखता है, अन्य व्यक्ति संवाद में श्रेष्ठ हैं तथा एक व्यक्ति अकाउण्ट्स में श्रेष्ठता रखता है। जब हम कोई व्यवसाय/प्रोजेक्ट शुरू करते हैं तो हमें हर क्षेत्र के व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे कुशल व्यक्तियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह बहुत आवश्यक है कि आप उनमें आपस में अच्छा तालमेल बैठा सकें। आपका हर व्यक्ति से मधुर सम्बन्ध हो। आपका दायित्व है कि हर व्यक्ति को अच्छा कार्य करने हेतु प्रेरित करना एवं उनसे अधिकतम कार्य कुशलतापूर्वक पूर्ण करवाना। सफलता के लिए, कार्यों का सही आकलन एवं विभिन्न विभाग के व्यक्तियों में आपस में तालमेल एवं समन्वय स्थापित रखना, बहुत आवश्यक है। ऐसा करने से आप जिस किसी व्यवसाय में भी कदम रख रहे हैं, उसमें आर्थिक उपादेयता (Economic Viability) बढ़ती है एवं व्यवसाय सुचारु रूप से चलता है। किसी भी व्यवसाय की सफलता के लिए, उस व्यवसाय में संलग्न व्यक्तियों में मधुर सम्बन्ध, आपस में समन्वय, उनमें अच्छे कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करता है एवं साथ ही कार्य के प्रति, उस व्यवसाय के प्रति लगाव, समर्पण बढ़ता है। किसी भी व्यवसाय की सफलता वस्तुतः उस व्यवसाय में संलग्न विभिन्न व्यक्तियों के समग्र प्रयासों का सुपरिणाम है। सहकर्मियों के अच्छे कार्यों की प्रशंसा: हर व्यक्ति को अपनी प्रशंसा अच्छी लगती है। कोई आपके स्वभाव की, आपके व्यवहार की, आपके कार्यों की प्रशंसा करता है तो आपको कितना अच्छा लगता है? प्रशंसा से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है, वह सम्मानित महसूस करता है, वह आपके प्रति अधिक वफादार होता है एवं वह कार्य के प्रति अधिक समर्पित होता है। उसके मन में आपके प्रति अधिक सम्मान का भाव जाग्रत होता है। अधिकांश लोग, स्वयं की तारीफ सुनना तो पसंद करते हैं, लेकिन स्वयं दूसरों की तारीफ करने में बड़े कंजूस होते हैं। किसी भी व्यवसाय में संलग्न सहकर्मियों का कार्य के प्रति समर्पण होना, उस व्यवसाय की सफलता की अनिवार्य आवश्यकता है। आप मशीन की तरह मनुष्य को बटन दबाकर, कम या ज़्यादा गति से नहीं चला सकते। उनका दिल से सहयोग प्राप्त करने के लिए, उनके कार्यों की प्रशंसा करना, उनके सुख-दुःख में काम आना, उनके प्रति विनम्र व्यवहार, उनकी भावनाओं की कद्र करना, ऐसे महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं, जो किसी भी व्यवसाय/व्यक्ति की सफलता में बहुत अहम् भूमिका अदा करते हैं। तारीफ करते समय इस बात का ध्यान रखें कि जिस व्यक्ति की तारीफ की जा रही है उसे ऐसा प्रतीत न हो कि आप उसका मज़ाक बना रहे हो या उसकी झूठी तारीफ कर रहे हो। आप पूरी गम्भीरता से, सच्चे मन से तारीफ करें। यदि कोई ऐसी नीति हो कि व्यक्ति के अच्छे कार्य हेतु कोई पुरस्कार भी दिया जा सके तो इस तरह की नीति को लागू करना भी आपको सफल बनाने में मददगार होगा। ‘‘इन्तज़ार करने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।” &#8211;अब्दुल कलाम सहकर्मियों के साथ संवाद: प्रशासन का एक नियम यह भी है कि व्यक्ति का अपने सहकर्मियों के साथ संवाद बना रहे। किसी सहकर्मी को, किसी अधीनस्थ कर्मचारी को कोई समस्या हो, कोई कहीं गलती नज़र आए, कोई ऐसी बात दिखाई दे जो व्यवसाय के हितों के विपरीत हो, तो वह उस बात को अपने अधिकारी को तुरन्त बताए एवं हिचकिचाए नहीं। यह बात बहुत महत्त्वपूर्ण है। बोसिज्म (Bossism) एक बड़े उद्योग में तो सम्भव है या सरकारी उपक्रम में सम्भव है, लेकिन सहकर्मियों का दिल जीतने के लिए आवश्यक है कि आपका उनसे संवाद बना रहे। आपको अपने सहकर्मियों के दुःख-सुख का पता हो, आप उनकी खुशियों में सम्मिलित हों, उनके दु:ख में उनके साथ हों। ये सब, तब ही सम्भव है, जब आपका उनके साथ संवाद (Communication) सही रूप में बना रहे। किसी भी व्यवसाय की सफलता के लिए, संवादहीनता बहुत ही घातक होती है। संवादहीनता से गलतफहमियाँ पैदा होती हैं। व्यक्ति मात्र एक मशीन की तरह...</p>
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		<title>Motivational thoughts in Hindi &#8211; प्रेरक विचार हिंदी में</title>
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		<pubDate>Tue, 06 Aug 2019 16:52:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>Motivational Thoughts in Hindi Best Motivational thoughts in Hindi for students / जीवन में सफल होने हेतु सबसे अच्छे प्रेरक विचार हिंदी में, ज़िन्दगी में आगे बढ़ने हेतु या उन्नति के लिए Motivational thoughts (प्रेरक विचार) जो आपकी जीत के प्रमुख पड़ावों को पार करने में आपकी मदद करेंगे!   लक्ष्य निर्धारण &#8211; Motivational Thoughts in Hindi बिना लक्ष्य निर्धारण के व्यक्ति इधर-उधर भटकता रहता है, जब तक आपको यह पता नहीं है कि आपकी मंजिल क्या है? आप क्या प्राप्त करना चाहते हैं? आपकी आकांक्षा क्या है? तब तक आप द्वारा की गई कोशिश, बिना दिशा ज्ञान के चलने वाली नौका के समान है। ऐसी नौका का नाविक बस पतवार चलाता रहता है। वह कहाँ पहुँच गया या वापस वहीं आ गया, जहाँ से चला था, इसका उसे कुछ पता ही नहीं रहता। अपना लक्ष्य तय करने के बाद से ही व्यक्ति उस लक्ष्य प्राप्ति हेतु गम्भीरता से प्रयास करने लगता है। अनेक व्यक्ति अपने सामने बहुत बड़ा लक्ष्य रखकर, उस लक्ष्य प्राप्ति हेतु पूरी लगन एवं निष्ठा से स्वयं को झोंक देते हैं। इनमें से कई व्यक्ति अपने लक्ष्य की प्राप्ति भी कर लेते हैं, जबकि कुछ असफल भी हो जाते हैं। हमारा मानना है कि यदि सम्भव हो, तो अन्तिम बडे लक्ष्य की अपेक्षा छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित कर लेने चाहिए। मान लो आप किसी बड़े लक्ष्य की प्राप्ति हेतु दो वर्ष देना चाहते हैं, तो आप अपने लिए 6-6 माह के लिए लक्ष्य निर्धारित कर लें और इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में आने वाली समस्याओं एवं कठिनाइयों का स्वयं आकलन करें, समीक्षा करें। अपने प्रयासों का विश्लेषण, समीक्षा और अपनी कमियों का ज्ञान अगले लक्ष्य की प्राप्ति में अत्यधिक मददगार होता है। एक बात का और भी ध्यान रखें। यह एक व्यावहारिक बात है कि लक्ष्य, आपकी योग्यता, क्षमता के अनुरूप हो, इसका अर्थ यह नहीं है कि हम अपनी योग्यता, क्षमता में वृद्धि नहीं कर सकते। अपनी योग्यता, क्षमता में वृद्धि निश्चित रूप से की जा सकती है, लेकिन इस हेतु जिन साधनों की आवश्यकता है, उनके सन्दर्भ में निर्णय करें। एक और महत्त्वपूर्ण बिन्दु यह है कि जितना बड़ा आपका लक्ष्य होगा, आपको उतनी ही अधिक मेहनत करनी होगी। बड़े लक्ष्य की प्राप्ति हेतु किया गया प्रयास भी उतना ही वृहत् होना चाहिए। लक्ष्य निर्धारण करने के बाद ही आप उस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अपनी योग्यता और क्षमता को एक निश्चित दिशा में प्रयुक्त करना शुरू करते हैं। लक्ष्य निर्धारण से आपको एक निश्चित दिशा में कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। लक्ष्य निर्धारण से तात्पर्य यह है कि आप में उस लक्ष्य को प्राप्त करने की इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास है। लक्ष्य निर्धारण करने के बाद ही आप आत्मविश्लेषण कर, स्वयं को उस लक्ष्य प्राप्ति हेतु तैयार करते हैं और स्वयं को अनुशासित कर, लक्ष्य प्राप्ति के पथ पर अग्रसर होते हैं। लक्ष्य निर्धारण के बाद आप योजना बनाकर बहुत समझदारी से, मेहनत से लगन एवं निष्ठा से उस लक्ष्य को प्राप्त करने में जुट जाते हैं। लक्ष्य की प्राप्ति से आपका आत्मविश्वास बढ़ता है, स्वयं के प्रति सम्मान बढ़ता है, स्वयं की क्षमता एवं योग्यता पर विश्वास बनता है। आप में और अधिक संघर्ष करने की लौ जागती है। अत: लक्ष्य निर्धारण बहुत महत्त्वपूर्ण है, यह जीत की राह का अहम् पड़ाव है। संघर्ष का दौर- Motivational Thoughts in Hindi लक्ष्य तय करने के बाद, शुरू होता है आपका संघर्ष का दौर। आपने जो मंजिल तय की है, उसे प्राप्त करने हेतु आप अपनी पूर्ण शक्ति और लगन के साथ जुट जाते हैं। यह वह दौर है, जिसमें व्यक्ति स्वयं की योग्यता एवं क्षमता का आकलन करता है। यह ऐसा दौर होता है, जिसमें व्यक्ति स्वयं की इच्छाशक्ति, अपनी मेहनत करने की क्षमता एवं स्वयं के गुणों को ऑकता है। इस दौर में व्यक्ति को स्वयं की कमियों तथा अक्षमताओं का ज्ञान होता है। होता यह है कि व्यक्ति जोश-जोश में लक्ष्य निर्धारित कर लेता है। वह बहुत उत्साह एवं उल्लास से सोच लेता है कि वह इस लक्ष्य को तो हर परिस्थिति में प्राप्त करके ही रहेगा, लेकिन जब संघर्ष का दौर और स्वयं की कुव्वत को ऑकने का मौका आता है, तो पता चलता है कि वह कहाँ पर है, जिस कार्य को वह बहुत आसान समझता था, वही उसे बहुत कठिन जान पड़ता है। कुछ व्यक्ति संघर्ष के दौर में शुरू के कुछ दिनों में बहुत अनुशासन में, बहुत गम्भीरता से प्रयास करते हुए देखे जाते हैं, लेकिन बाद में वे बिल्कुल ढीले हो जाते हैं एवं निष्क्रिय होकर, अपने लक्ष्य प्राप्ति अभियान से उन्मुख होकर, उदासीन से बैठ जाते हैं। यह कठिनाइयों और समस्याओं से मुकाबला करने का दौर है। इस दौर में बहुत आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। यह एक ऐसा दौर है, जब आपको बहुत अनुशासित रहकर, धैर्यपूर्वक, पूर्ण लगन एवं निष्ठा से परिश्रम करते हुए शनैः-शनै: अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ना है। इस दौर में आने वाली कठिनाइयों से घबराना नहीं है। आपको सकारात्मक दृष्टिकोण से आशावादी होकर आगे बढ़ना है। छोटी-मोटी असफलताएँ आपको विचलित न कर दें, इसका ध्यान रखें। विजय पथ पर, कई बार पराजय होती है, लेकिन जो पराजित होकर बैठ गया, वह कभी विजेता नहीं बन सकता है। असफलताओं से सीखें एवं अपनी कमियों को दूर करें। पुनः प्रयास करें। सफल होंगे ही। यह संघर्ष का दौर एक कसौटी है, जिसमें आप स्वयं को परखते हैं, स्वयं को आँच में तपाते हैं एवं स्वयं में निखार लाते हैं। यह दौर स्वयं को बेहतर बनाने का, स्वयं को निखारने का, स्वयं को परखने का एवं आत्मविश्लेषण का शानदार दौर है। जीत का दौर &#8211; Motivational Thoughts in Hindi यह वह समय है, जब आप निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त कर चुके होते हैं, इस दौर में आप हर्ष, उल्लास, आत्मविश्वास से भरे होते हैं। आप स्वयं की योग्यता/क्षमता पर नाज कर रहे होते हैं। यह दौर विजेता की तरह खुश होने का, गर्व करने का है। जीवन में जीत दर्ज करना एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है, जो आकस्मिक नहीं मिलता, इसके लिए बहुत त्याग और तपस्या की आवश्यकता होती है। व्यक्ति को अपनी जीत का जश्न अवश्य मनाना चाहिए। जश्न मनाने का अर्थ, सार्वजनिक रूप से किसी पार्टी आदि से...</p>
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		<title>Top 30 Real life Inspirational Stories in Hindi</title>
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		<pubDate>Thu, 25 Jul 2019 11:42:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>Real life Inspirational Stories in Hindi Real Life Inspirational Stories in Hindi / Motivational Stories के इस भाग में कुछ ऐसे व्यक्तियों के जीवन-प्रसंगों को लिया गया है, जो सचमुच आपको जीवन में आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करते हैं, प्रोत्साहित करते हैं तथा आपकी सुषुप्त ऊर्जा को पुनः जाग्रत कर, उन्हें प्रगतिपथ पर प्रशस्त होने की हिम्मत प्रदान करते हैं। Best Inspirational Stories &#8211; वस्तुतः सफलता व्यक्ति की सोच में होती है। जब हम विषम परिस्थितियों में सफल होने वाले साधारण व्यक्ति की कहानी पढ़ते हैं, तो इन Motivational कहानियों से मिलने वाली प्रेरणा हमारे मन-मस्तिष्क को उद्वेलित कर हमें सफलता की बुलन्दियों को छूने के लिए तैयार करती है, प्रोत्साहित करती है।  ये ऐसी जीवन्त Inspirational / Motivational (Stories) कहानियाँ हैं, जो आपके जीवन की दिशा, आपके सोचने का ढंग एवं आपके जीने का अन्दाज बदलने हेतु आप में पर्याप्त ऊर्जा का संचार कर सकती हैं। आप इन सभी प्रेरणास्पद व्यक्तित्व की सफलता की कहानियों को बार-बार पढ़े एवं स्वयं की परिस्थितियों से तुलना करें। आप पाएँगे कि आपकी परिस्थितियाँ कितनी अनुकूल हैं, जबकि इन व्यक्तियों ने कितनी प्रतिकूल परिस्थितियों में संघर्ष कर जीवन में सफलताएँ अर्जित की हैं। जानें &#8211; Top 30 Real Life Inspirational Stories in Hindi / Motivational Stories For Students in Hindi language by &#8211; Lokhindi डॉ.ग्लेन कनिंघम: दृढ़ संकल्प-शक्ति के महानायक एक बार एक छोटा-सा (8 वर्ष का) बच्चा स्कूल में आग से बुरी तरह जल गया उसकी टाँगें बहुत बुरी तरह से जल गईं थीं। डॉक्टरों ने कहा कि वह कभी चल नहीं पाएगा। उसके पैरों का सारा माँस जल चुका था। अस्पताल से जब वह घर आया, तो उसकी माँ उसके पैरों की रोजाना मालिश करती और उसे हील चेयर पर घुमाने पास के मैदान में ले जाती। उस बच्चे में बड़ा दृढ़ विश्वास था, उसकी संकल्पशक्ति काबिले तारीफ़ थी। उसे विश्वास था कि चाहे कुछ भी हो, वह चलेगा। एक दिन जब उसकी माँ उसे ह्वील चेयर पर बैठाकर कहीं चली गई, तो उसने स्वयं को उस चेयर पर से गिरा लिया एवं स्वयं को घसीटना शुरू कर दिया। वह रोजाना ही ऐसा करता रहा और धीरे-धीरे उसके पैरों में कुछ जान आने लगी। वह खड़ा होने लगा, फिर बहुत धीरे-धीरे चलने लगा। फिर सामान्य तरह से चलने लगा। फिर वह दौड़ने लगा। एक दिन वह अमेरिका का एक मील दौड़ने वाला सबसे तेज धावक बन गया। उसने 1500 मी की दौड़ में विश्व रिकॉर्ड बनाया। वह कोई और नहीं डॉ. ग्लेन कनिंघम थे। कनिंघम की संकल्प-शक्ति को बार-बार नमन है। हाथों का मोहताज नहीं हौसला:  सकारात्मक सोच के साथ ज़िद की जाए तो वास्तव में दुनिया बदल सकती है। ऐसा ही कर दिखाया है श्रीराम कॉलोनी सांगानेरी निवासी 15 वर्षीय किशोर रोशन नागर ने। वर्ष 2002 में हुए हादसे में दोनों हाथ व एक पैर गवाँ देने के बाद पढ़ाई का सपना चूर हो चुका था। घर के बड़े बुजुर्गों की हिम्मत भी जवाब दे चुकी थी, लेकिन रोशन ने जिद की और आज वह दसवीं की बोर्ड परीक्षा दे रहा है। वर्ष 2002 में घर की छत से गुजर रही हाइटेंशन लाइन के तारों में दोस्त की पतंग सुलझाने के दौरान रोशन नंगे पैर ही छत पर चला गया। लोहे का सरिया हाथ में लेकर रोशन पतंग के लिए लपका, तो उसे ऐसा करण्ट लगा कि एक पैर और दोनों हाथ गवाने पड़े। दो ऑपरेशन के बाद दादा नारायण उसे घर ले आए। इलाज के करीब दस माह बाद रोशन ने पढ़ने की इच्छा जाहिर की इस ज़िद पर दादी किसना देवी ने हौसला बढ़ाया, उन्होंने उसके हाथ में कलम बाँधकर लिखने का अभ्यास करवाया। कड़ी मेहनत के बाद उसने वर्ष 2003 में पाँचवीं कक्षा में फिर से स्कूल जाना शुरू किया। इसी लगन के साथ उसने छठी में 52%, सातवीं में 62%, आठवीं में 79% और नौवीं में 64% अंक हासिल किए। बिना हाथ के 15 वर्षीय रोशन नागर का हौसला देखिए। रोशन ने कटे हाथ पर कलम बाँधकर जयपुर के नेवटा केन्द्र पर दसवीं की परीक्षा दी है। रोशन कहता है-वह किसी पर बोझ बनकर नहीं रहना चाहता। वह सीए बनना चाहता है। Real Life Inspirational Stories in Hindi  अभिनव बिन्द्रा: जिद और जुनून ने दिलाया गोल्ड ओलम्पिक में भारत को गोल्ड मेडल मिलने से हर भारतवासी खुशी से झूम उठा। बिन्द्रा की ज़िद और जुनून ने उन्हें इस मुकाम पर पहुँचाया है। बैंकॉक में हुए वर्ल्ड शूटिंग चैम्पियनशिप में बिन्द्रा की टीममेट रहीं इण्टरनेशनल शूटर श्वेता चौधरी ने कहा कि बिन्द्रा ने जो कहा, वह कर दिखाया। श्वेता मामूली अन्तर से ओलम्पिक टीम में जगह बनाने में नाकाम रहीं। श्वेता ने बताया कि बिन्द्रा ओलम्पिक गोल्ड के लिए पिछले चार साल से अनवरत मेहनत कर रहे थे। बिन्द्रा ने जो कहा, वह कर दिखाया। ऐसे बदली दुनिया, श्वेता बताती हैं कि एथेन्स ओलम्पिक के बाद अभिनव के व्यवहार में चेन्ज आया। एथेन्स ओलम्पिक में पदक हासिल न करने के बाद ही उन्होंने निश्चय कर लिया था कि वह अगला मौका (बीजिंग ओलम्पिक) नहीं गंवाएँगे। एक स्मरण सुनाते हुए श्वेता ने कहा कि बैंकॉक में वर्ल्ड चैम्पियनशिप के दौरान जब भारतीय टीम के अन्य शूटर शाम को शहर घूमने गए थे, बिन्द्रा जिम में एक्सरसाइज कर रहे थे। शायद अभिनव को एथेन्स ओलम्पिक में पदक नहीं जीतने का सदमा ऐसा लगा कि उनके व्यवहार में काफी परिवर्तन आ गया। उसके बाद से वह रिजर्व रहने लगे। इसके पहले वह साथियों के बीच आकर हँसी-मजाक करते थे। इसके बाद वह लगातार विदेशों में जाकर प्रैक्टिस करते रहे। श्वेता ने बताया कि बिन्द्रा ने स्वयं ही अपने लिए प्राइवेट कोच, पादकलॉजिस्ट व फिजियो नियुक्त किया था। इसके बावजूद, छोटी प्रतियोगिताओं में उनके मेडल न जीतने पर कई बार उनकी आलोचना भी हई, परन्तु उनको जानने वाले जानते थे कि अभिनव में वह क्षमता है, जो वक्त आने पर बड़ी प्रतियोगिता में अवश्य दिखेगा। उनका टारगेट ओलम्पिक ही था। गोल्फ कैडी: Real Life Inspirational Stories in Hindi बंगलुरु के गोल्फ क्लब में कैडी (अर्थात् खिलाड़ियों के पीछे बैग उठाकर चलने वाले लड़के) का कार्य करने वाले, चिन्ना स्वामी मनियप्पा ने 11 अक्टूबर, 2009 को 12.5 लाख डॉलर की हीरो होण्डा इण्डियन ओपन चैम्पियनशिप जीतकर सभी को अचम्भे में डाल...</p>
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		<title>सफलता क्या है? &#8211; Hindi Motivation for Students</title>
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		<pubDate>Thu, 18 Jul 2019 15:47:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सफलता क्या है? सफलता क्या है? किस उपलब्धि को जीवन में सफल कहना उचित होगा? क्या परीक्षा में अच्छे अंक लाना ही सफल होना है &#8211; Best Hindi Motivation for students / What is success, क्या हर व्यक्ति सफल होता है &#8211; जानें ऐसा बहुत बार देखने को मिलता है कि दूसरों को सफल दिखाई देने वाले व्यक्ति, अन्दर से बहुत खिन्न, परेशान एवं टूटे हुए होते हैं। आर्थिक सम्पन्नता को सफलता का मापदण्ड माना जाना, एक बड़ी गलती है, लेकिन मानसिक सन्तुष्टि को सफलता से अवश्य जोड़ा जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है। हर व्यक्ति चाहता है उसे सम्मान मिले, उसके पास पर्याप्त धन हो, रहने के लिए मकान हो एवं अपने मित्रों में, समाज में उसको प्रतिष्ठा मिले। हर व्यक्ति की अभिलाषा होती है वह जो भी कार्य करे, उसमें उसे सफलता मिले। सफलता का आलिंगन हर व्यक्ति करना चाहता है। लेकिन क्या हर व्यक्ति सफल होता है या  हम कहें कि क्या हर व्यक्ति को सफलता मिलती? इस प्रश्न का उत्तर बड़ा सरल है, नहीं। हर व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती। सफल होने वाले व्यक्ति, असफल होने वाले व्यक्तियों की तुलना में काफी कम होते है या यह भी कह सकते हैं कि असफल होने वाले व्यक्ति सफल होने वाले व्यक्तियों से संख्या में बहुत अधिक होते हैं। ऐसे व्यक्ति जिन्हें सफलता मिलती है क्या उनमें कुछ खास विशेषता, कुछ विशेष गुण होते हैं? इसका विश्लेषण करने से पूर्व हम इस बिन्दु पर गौर करना चाहेंगे कि वस्तुतः सफलता है क्या? सफलता का अर्थ क्या है?  किस उपलब्धि को सफलता कहना उचित होगा? क्या धन कमाना सफलता है? क्या हर धनी व्यक्ति को हम सफल व्यक्ति की श्रेणी में रख सकते हैं? यदि इस बात पर विचार करें तो पता चलेगा कि धन तो बहुत ही क्षुद्र वस्तु है। हर तस्कर, वेश्या, डकैत, माफिया, भ्रष्ट व्यक्ति के पास धन का अम्बार है, लेकिन उन्हें सफल नहीं माना जा सकता। क्या कुछ विशेष पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति का सफल कहा जा सकता है? इस पर गौर करें तो हमें लगेगा कि ऐसे व्यक्ति को सफल माना जाना चाहिए लेकिन मात्र पुरस्कृत होने से कोई सफल माना जाए, यह सही नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के पास अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त रोज़गार नहीं है और उसे कोई भी पुरस्कार मिल जाता है, तो यह एक बार की प्रशंसा, उसे सफल व्यक्तियों की श्रेणी में पंक्तिबद्ध नहीं कर सकती। अभी कुछ ही दिन पूर्व अख़बार में समाचार पढ़ने को मिला कि एक परिवार अपने पुत्र को मिले अर्जुन अवार्ड को आर्थिक कारणों से बेचने पर मजबूर हो गया। क्या परीक्षा में अच्छे अंक लाना सफलता है? एक छात्र के लिए किसी अभीष्ट परीक्षा में अच्छे अंक लाना सफलता माना जा सकता है, लेकिन यदि अच्छे अंक आने के बावजूद उसे किसी अभीष्ट कोर्स में दाखिला ना मिले या अन्य कोई ऐसा लाभ ना मिल सके तो वह सफलता नहीं हुई ना? यदि उसके अन्य साथियों के भी अच्छे अंक आए हैं तो प्रतिस्पर्धा में कोई-न-कोई तो निराश होगा ही।  मानो 10 सीट हैं, लेकिन 20 छात्रों के अच्छे अंक आए हैं। तो जिनको दाखिला नहीं मिला, वे असफल माने जाएँगे। एक खिलाड़ी के लिए, किसी स्पर्धा में जीत हासिल कर लेना, एक टीम के लिए किसी खेल स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त कर लेना, सफलता कहा जा सकता है। इसका अर्थ हुआ कि सफलता के लिए, किसी अन्य से उत्कृष्ट प्रदर्शन की आवश्यकता है। दूसरे शब्दों में सफलता निरपेक्ष नहीं है, बल्कि वर्तमान सन्दर्भ में सफलता सापेक्ष है। यह भी पढ़े: अपूर्व साहस Inspirational Story सफलता व्यक्तिशः है एक व्यक्ति को सफलता, मात्र एक ऐसी नौकरी पाने में आती है जिसमें उसका एवं उसके परिवार का आराम से भरण-पोषण हो रहा है एवं साधु को सफलता भगवान के भजन करने में नज़र आती है। एक प्रेमी को सफलता अपनी प्रेमिका से शादी करने में नज़र आती है। किसी के लिए कोई तय लक्ष्य प्राप्त कर लेना सफलता है। एक छात्र को सफलता रोज़गार प्राप्त करने में नज़र आती है। एक डॉक्टर को सफलता अपने मरीज़ का रोग निदान करने में नज़र आती है। एक व्यवसायी को सफलता, अपने व्यवसाय के सुचारु रूप से चलने में नज़र आती है। एक वैज्ञानिक के लिए सफलता एक नई खोज में है। इसी प्रकार, एक एथलीट के लिए सफलता अपनी स्पर्धा में प्रथम आने में है। इस तरह हर व्यक्ति के लिए सफलता के अलग-अलग मायने हैं, आयाम हैं, लेकिन बहुत-से ऐसे व्यक्ति भी हैं जिन्हें सब कुछ मिलने के बाद भी वे हमेशा असन्तुष्ट नज़र आते हैं, वे हमेशा स्वयं को अन्य की तुलना में कमतर समझते हैं। ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है। इस तरह सफलता व्यक्तिगत है। सफलता व्यक्ति के विचारों से निर्धारित होती है। यदि इस दृष्टिकोण से सफलता को समझने का प्रयास करें तो हम पाते हैं कि जिस कार्य को करने से आप सन्तुष्ट होते हैं, आपको आन्तरिक खुशी होती है, आपको सुकून मिलता है तो यह सफलता है। सफलता के लिए, मानसिक सन्तुष्टि सबसे अहम् आवश्यकता है। सफलता क्यों? आप और मैं ही नहीं, हर व्यक्ति सफल होना चाहता है। प्रत्येक व्यक्ति की ख्वाहिश होती है, दिल में तमन्ना होती है। कि वह जो भी कार्य करे, उसमें वह सफल हो जाए। हर व्यक्ति सफलता की अभिलाषा रखता है, प्रत्येक व्यक्ति सफलता का वरण करना चाहता है। सफलता का अर्थ व्यक्तिगत है। एक मजदूर के लिए सफलता, अपने लिए एवं अपने परिवार के लिए दो चुन की रोटी का प्रबन्ध करना है। तो एक व्यवसायी के लिए सफलता, उसके द्वारा निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति है चाहे वह आय के सन्दर्भ में हो या बिक्री वृद्धि सन्दर्भ में या उत्पादन के सन्दर्भ में। एक डॉक्टर के लिए सफलता, उसके मरीज़ का सफल इलाज है तो उन वैज्ञानिक के लिए सफलता, उसके द्वारा किए जा रहे अनुसन्धान में सफलता है। बहत-से लोगों के लिए, धन ही सफलता का मापदण्ड है। जबकि बहुत-से व्यक्तियों के लिए किसी पुरस्कार की प्राप्ति सफलता का मापदण्ड है, लेकिन यदि एक करोड़पति व्यक्ति, लाइलाज रोग से ग्रसित हो जाए तो क्या उसे सफल कहा जा सकेगा? इसी प्रकार, किसी बड़े पुरस्कार से नवाज़े...</p>
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		<title>जीतना है तो ज़िद करो। Motivational Stories Hindi for Success</title>
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		<pubDate>Sun, 07 Jul 2019 15:56:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>Motivational Stories  हर व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है बिना उचित मार्गदर्शक के व्यक्ति सुषुप्त अवस्था में रहता है, Motivational Stories Hindi for Success जो आपको जीवन में सफल होने हेतु मार्गदर्शक करती है। Motivational Story Hindi सफलता प्राप्ति हेतु विभिन्न तत्वों का विस्तृत विवेचन करने के साथ साथ, असफल होने के विभिन्न कारणों का भी विवेचन किया गया है। वस्तुतः सफलता, असफलता जीवन रूपी सिक्के के दोनों फलक ही तो हैं। सफलता का जन्म असफलता की कोख से ही होता है, Motivational Stories Hindi  में सफलता की राह में आने वाली परिस्थितियां एवं उनके समाधान की विशेष रूप से चर्चा की गई है। जो व्यक्ति जीत दर्ज करता है, या सफल होता है, वह अन्य व्यक्तियों से कुछ हटकर तो है। विजेता में कुछ तो खास बात है कि वह जीत गया। भीड से कुछ अलग हटकर करने की उसने ठानी, तभी वह जीत दर्ज करने में कामयाब हुआ। ‘जीत&#8217; के लिए आवश्यक है जीतने की उत्कट इच्छा। वस्तुतः हर विजेता के मस्तिष्क में जीतने की अपरिमित लालसा व्याप्त रहती है। जीवन में अगर जीतना चाहते हैं, तो जीत के लिए अदम्य लालसा पैदा करें। जीत के लिए उत्कट इच्छा, व्यक्ति में दृढ़ संकल्प पैदा करती है। यह दृढ़ संकल्प ही तो उसमें आत्मविश्वास की लौ जाग्रत करता है। आत्मविश्वास से ही व्यक्ति में मेहनत करने का ज़ज्बा जाग्रत होता है। हर जीत एवं हर सफलता हेतु सर्वभूत केन्द्रित मेहनत की आवश्यकता है। ज़िद का अर्थ &#8211; Motivational Stories Hindi ज़िद का अर्थ है&#8211;अपनी सारी शक्तियों एवं योग्यताओं को जीत हेतु संकल्पित करें। अपनी ज़िद की पूर्ति हेतु पुरुषार्थ करें। ज़िद का अर्थ बच्चों की ज़िद जैसा नहीं, बल्कि किसी ऊँचाई को छूने और किसी सफलता को अर्जित करने हेतु किया गया अदम्य या अटूट संकल्प है। ज़िद का अर्थ, अपनी इच्छा शक्ति को समेटकर, अपनी योग्यता शक्ति एवं काबिलियत से भी बढ़कर, पुरुषार्थ कर, किसी इच्छित सफलता को प्राप्त करने हेतु संकल्पित होना है। किसी भी सफलता हेतु, सर्वप्रथम आवश्यकता है संकल्प (Determination) करने की। यदि आपका संकल्प अटूट और अदम्य और, तो सफलता निश्चित ही मिलेगी। अदम्य संकल्प के बल परें ही तो निहत्थे स्वतन्त्रता सेनानी, समूचे विश्व में पताका फहराने वाले ब्रिटिश साम्राज्य से, हमारे देश को स्वतन्त्र कराने में सफल हुए। यह ज़िद ही तो थी, महात्मा गाँधी की, पण्डित जवाहरलाल नेहरू की, सरदार पटेल की, भगत सिंह की, चन्द्रशेखर आजाद की एवं स्वतन्त्रता के अन्य महान् शूरवीरों की, जिससे अंग्रेजों को भारत छोड़ना ही पड़ा। संकल्प शक्ति के बल पर ही, असम्भव-सा दिखाई देने वाला कार्य, सम्भव हो सका। मात्र लंगोटी, अंगोछे में रहने वाले गाँधी, अपनी संकल्प शक्ति के बल पर, अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने में सफल हो पाए। ज़िद की पूर्ति हेतु अगर सही रूप एवं सही दिशा में प्रयास किया जाए, पुरुषार्थ किया जाए, तो सफलता मिलती ही है। जिद तो करो &#8230;Motivational Stories Hindi निश्चय करो, एक विचार बनाओ, मन में दृढ़ प्रतिज्ञ हो, फिर देखो जीत क्यों नहीं मिलेगी। एक निश्चय करने के बाद, रास्ते स्वयं निकलते हैं। कहते भी हैं जहाँ चाह, वहाँ राह। यह चाह ही तो महत्त्वपूर्ण है, आपने मन में ठान ली, तो फिर कोई भी मंजिल कठिन नहीं है। मुझे स्कूल में पढ़ी एक कविता की कुछ पंक्तियाँ याद आती हैं। “है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके आदमी के मग में।” यदि आपने एक बार ज़िद कर ली, निश्चय कर लिया तो ऐसा कोई विघ्न नहीं है, जो आपके रास्ते में रुकावट बनकर आपको मंजिल तक पहुँचने से रोक सके। मंजिल जितनी ही दूर हो, आपका निश्चय उतना ही प्रबल होना चाहिए। याद रखें, सफलता के मार्ग में छोटी-मोटी परेशानियाँ/कठिनाइयाँ तो आती ही हैं। सफलता का मार्ग यदि बिना काँटों का हो, सरल हो, तो उस सफलता का मजा ही नहीं आता। संघर्ष ही तो पुरुषार्थ की पहचान कराता है। जीवन भी तो संघर्ष का ही नाम है। हम अक्सर संघर्षों की तपती धरा से बचने के लिए, शीतलतायुक्त सरल मार्ग की तलाश में, मंजिल से च्युत होकर भटकने लगते हैं। आपकी मंजिल जितनी ऊँची होगी, आपकी महत्त्वाकांक्षा जितनी बड़ी होगी, आपका लक्ष्य जितना उत्कर्ष होगा, आपको उतना ही अधिक संघर्ष करना होगा। निश्चय उतना ही दृढ़ होना चाहिए। आपकी ज़िद उतनी ही पक्की होनी चाहिए। ज़िद के पक्के व्यक्ति के समक्ष हर चुनौती बौनी हो जाती है। जो व्यक्ति संघर्ष करने से नहीं कतराता है, जो परेशानियों से निरन्तर जूझने की क्षमता और कुव्वत रखता है, वही अन्ततः सफल होता है। कहते हैं- “No Pain, No Gain! बिना परेशान हुए, लाभ नहीं मिलता।” अतः संघर्षों से डरना कैसा? संघर्षों को जीवन का हिस्सा मानकर, सफलता के पथ पर पूर्ण आत्मविश्वास के साथ, पूर्ण दृढ़ता के साथ अग्रसर होएँ, सफलता आपका विजेता की तरह स्वर्णिम फूलों की माला से स्वागत करेगी, अंगीकार करेगी। जीत का अर्थ क्या है? Motivational Stories Hindi ‘जीत&#8217; एक बहुत व्यापक अर्थ वाला शब्द है। वैसे जीत का अर्थ, किसी की पराजय में निहित है अर्थात् ‘जीत&#8217; सापेक्ष है, कोई हारेगा, तभी तो आप जीतेंगे या यह कहें कि किसी को पराजित करने पर ही तो  आपको ‘जीत&#8217; का मजा आएगा। वर्तमान सन्दर्भ में जीत को सफलता का पर्याय माना जा सकता है। जिस तरह से आपका जीतना, किसी की पराजय पर निर्भर है उसी प्रकार वर्तमान में सफलता भी निरपेक्ष नहीं है, बल्कि यह सापेक्ष है। सफलता का अर्थ अपने आस-पास, मित्रों, रिश्तेदारों, एक ही उद्योग एवं व्यापार में सम्बद्ध व्यक्तियों से आगे बढ़ना है। सफलता या जीत का अर्थ, अन्य से श्रेष्ठता प्राप्त करना है। इस बात को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सफलता का अर्थ श्रेष्ठ होना नहीं, बल्कि अन्य से अधिक श्रेष्ठ होना है। यह मात्र एक उपदेश ही है कि अन्य की सफलता का हमें स्वागत करना चाहिए। कौन चाहता है कि अन्य व्यक्ति उससे आगे बढ़े? कौन पराजय का आलिंगन करना चाहता है? कौन नहीं चाहता कि वह ही हमेशा जीते? कहीं-न-कहीं हम अन्य को, स्वयं से श्रेष्ठ पाकर आहत होते ही हैं, इसलिए हम कहते हैं कि सफलता सापेक्ष है।   किसी लक्ष्य की प्राप्ति आज यदि सफलता है, तो यह लक्ष्य, किसी अन्य व्यक्ति/संगठन/संस्था/समुदाय/व्यापार/उद्योग आदि के सन्दर्भ में ही तो तय किया जाता...</p>
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