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	<title>HINDI GYAN &#8211; Lok Hindi</title>
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		<title>Hindi Riddles With Answers &#8211; Puzzles, Riddles हिंदी में</title>
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		<pubDate>Wed, 29 Apr 2020 17:08:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>Hindi Riddles With Answers Hindi Riddles With Answers, जो की एक तरह से मानसिक सजगता और मनोरंजन तथा इंसान की निरीक्षण क्षमता के विकास के लिए एक सहज और प्रभावशाली साधन है। तो अभी पढ़े Best Hindi Riddles With Answers (2020 Updated) / हमारी वेबसाइट लोकहिंदी पर अभी देखे Latest Riddles With Answers, Hindi Puzzles with Answer, सभी Hindi Riddles के उत्तर उसी Hindi Riddles With Answers के निचे लिखित है… 1. एक बुढ़िया को आटा पिसवाना हैं। बुढ़िया का घर &#8211; नदी के इस ओर हैं और चक्की नदी के उस ओर। नदी में बाड़ आए हुई हैं, कोई नाविक नदी पार करने को तैयार नहीं। बुढ़िया तैरना नहीं जानती। उसे घर में आज आने वाले मेहमानों के लिए रोटिया बनानी हैं। वह क्या करे? &#8211; अपने घर जाए और रोटी बनाये (क्योकि आटा तो उसके पास हैं पिसवाया तो गेहू जाता हैं) 2. इस ऐसा शब्द जिसमें &#8216;राम&#8217; का नाम होते हुए भी लोग उसे बुरा मानते हैं और कतराते हैं? &#8211; हराम 3. कौन-सा पक्षी ऐसा है जिसके सिर पर पैर होते हैं? &#8211; हर पक्षी के &#8216;सिर&#8217; पर यानी पंख और पैर होते हैं 4. चिंता और चिता में क्या अंतर है? &#8211; आधे न का 5. सरकार और बेकार में क्या समानता हैं? &#8211; कार की समानता 6. विश्व की सबसे ऊची सड़क? &#8211; खारइगला (लद्दाख में) 7. वह क्या हैं जो मर्द के आगे होता हैं और महिला के भी? &#8211; म अक्षर 8. &#8216;वधु&#8217; के कारण आदमी &#8216;वर&#8217; बनता है, मगर किसकी वजह से उसे जानवर बनना पड़ता है? &#8211; जान की वजह से 9. वह क्या है जो हर सोमवार में एक बार आता है, मगर पूरे साल में भी एक बार ही आता है? &#8211; स अक्षर 10. विश्वासपात्र दोस्त भी उसी की तरह होते हैं, मगर दगाबाज दोस्तों को भी अक्सर वही कह कर बुलाया जाता है? &#8211; कुता 11. सरदार और मजेदार वस्तु में सबसे बड़ी समानता क्या है? &#8211; दार 12. भगवान हो या शैतान दोनों में क्या समानता पाई जाती है? &#8211; न की समानता 13. &#8216;कन्या&#8217; पक्ष के लोग सदा &#8216;वर&#8217; को तलाशते हैं, लेकिन अगर वर के आगे कोई जान लगा दे, तो क्या होगा? &#8211; जानवर 14. अगर चंदा मामा को मामा न कहे तो क्या कहना होगा? &#8211; चंदा Best Hindi Riddles With Answers 15. भय के बाद में दिवार लगा दी जाए तो क्या होगा? &#8211; भयभीत 16. वो प्रशन, जो सो जाने वाले इंसान से भी लोग अक्सर पूछते हैं? &#8211; सो गया क्या 17. खौफ अगर नाक से आ चिपके तो क्या हो? &#8211; खौफनाक 18. वो क्या चीज हैं, जिसके बिना कोई पहचाना नहीं जाता? &#8211; आधार कार्ड 19. एक लाल साड़ी पीली बाल्टी के सफेद पानी में नीली रोशनी में डाल दी जाए तो क्या होगा? &#8211; साड़ी गीली हो जाएगी और क्या होगा 20. हिंदी वर्णमाला के कौन से अक्षर दांतो के लिए खराब होते हैं? &#8211; सडन New Hindi Paheliyan 2020 Collection 21. जवाब और शवाब, शराब और खराब &#8211; इनमें कम से कम एक समानता को सभी बता सकते हैं &#8211; मगर दूसरी एक और भी खास समानता पूरी समानता के साथ मौजूद है, बताइए क्या? &#8211; इन चारों शब्दों का वजन एक समान है 22. चित्र हर एक चित्रकार बनाता है, चित्र विचित्र भी होते हैं, लेकिन चित्र को अगर मान के साथ बना दिया जाए, तो क्या? &#8211; मानचित्र 23. मुजरिम ने अदालत में जज को समोसा की प्लेट लाने को क्यों कहा? &#8211; क्योकि जज ने कहा था &#8211; आर्डर आर्डर 24. पानी से भरा हुआ पर किसी की प्यास नहीं बुझा सकता? &#8211; समुद्र 25. सतहत्तर, अठहत्तर, उन्हत्तर में से कोन सी सख्या बड़ी हैं? &#8211; अठहत्तर 26. आदमी की मूर्ति जो मूर्ति नहीं हैं &#8211; मगर चलती हैं? &#8211; परछाई 27. दीपक और दीमक में क्या बड़ी समानता हैं? &#8211; दी व क की समानता 28. गाय के दूध में और मदर डेयरी के दूध में प्रमुख क्या समानता हैं? &#8211; दोनों में दूध हैं 29. पुस्तक और आदमीं में दो समानताये बताओ? &#8211; दोनों को पढ़ा जा सकता हैं, बिना ज्ञान के दोनों बेकार हैं 30. कुवारी और श्रीमती में क्या अन्तर हैं? &#8211; विवाह का 31. किन दो अंको को आपस में गुना करने पर परिणाम 5 आता हैं? &#8211; पाच और एक को (5X1) 32. जापान के लोग केला खाने के बाद उस केले का क्या करते हैं? &#8211; फ़ेक देते हैं 33. बिल्कुल साफ़ नाक के अन्दर क्या मिलता हैं? &#8211; फिंगर प्रिंट्स Check Youtube Video For Hindi Riddles With Answer: Check More Hindi Riddles &#38; Paheliyan on Lokhindi:  160 Hindi Paheli &#8211; ज्ञान वर्धक पहेलियां हिंदी Funny Tricky Questions and Answers in Hindi</p>
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		<title>जीवन मे आत्मनिर्भर बनने के 7 आसान तरीके</title>
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		<pubDate>Tue, 07 Jan 2020 18:01:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जीवन मे आत्मनिर्भर बनने के 7 आसान तरीके इस बात में कोई शक़ नहीं है की ज़िंदगी में आत्मनिर्भर होना उतना ही ज़रूरी है जितना की अच्छे लोगो का साथ होना जो आपको हमेशा प्यार व support करें हैं। अच्छे लोगो के साथ से ज़िंदगी आसान हो जाती है, पर ऐसा ज़रूरी नहीं है की हर वक़्त आपका साथ देने के लिए कोई हो। इसलिए आपको ऐसी situation में अपने आप को और सभी चीज़ो को संभालना आना चाहिए। तो आइये जाने आत्मनिर्भर बनने के कुछ आसान तरीके- ज़िम्मेदारी स्वीकार करे- आत्मनिर्भर बनने के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण है की आप अपनी और अपने परिवार की जिम्मेदारियां उठाए। पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी उठाना बहुत ही कठिन हो सकता है। तो पहले शुरुआत खुद की जिम्मेदारियों से करें। दुसरो पर निर्भर न होए और खुद के काम खुद ही संभाले। शुरूआती दौर में कुछ कठिनाइयाँ आ सकती है, पर अपने लक्ष्य पर डटे रहे और आत्मनिर्भर बने। &#160; अपने आपको प्रेरित करे- अगर आप आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं, तो खुद को प्रेरित करे। यह तो आपने सुना ही होगा &#8221; काल करे सो आज कर, आज करे सो अब &#8220;। इस दोहे के माध्यम से मैं यह कहना चाहती हूँ की अपना काम समय पर करें, कल पर ना छोड़े। और आपने काम स्वयं करें, दुसरो पर ना डालें। अपनी दिनचर्या सुधारें और अच्छे लोगो के साथ संबंद्ध बनाएँ जो आपको प्रेरित करें, Motivational quotes पड़ें। अपने आस पास के माहौल को अच्छा बनाएँ। आप अपने रूम में Canva से फ्री में motivational posters बनाकर लगा सकते हैं। इससे आपको प्रेरणा मिलेगी और आप जीवन में आत्मनिर्भर बन पाएंगे। अपनी Needs को पूरा करें- Codependent relationships में लोग दुसरो की needs पर ध्यान देने लगते है और अपनी needs को आम तौर पर ignore करते हैं। मेरा यह मानना है की सबकी कुछ needs होती है, जैसे की emotional, social, physical and spiritual needs। अपनी needs जाने, उन्हें खुद ही पूरा करें और self-responsible बनें। 7 easy ways to become self sufficient in life बुरे लोगों की संगति से दूर रहे- इस बात का ख़ास तौर से ध्यान रखें की आप कोई गलत दोस्त ना बनाएं जो हमेशा उदास रहता हो या दुसरो पर निर्भर रहता हो। ऐसे लोग बुरी vibes देते है और आपके लिए बाँधा बन सकते है। हमेशा अच्छे व active दोस्त बनाएँ जो positive vibes दे और आपको motivate करें। ऐसा करने से आप खुद अपने जीवन में अच्छा बदलाव महसूस करेंगे। Independently सोचे और खुद को पहचाने- आत्मनिर्भर बनने के लिए पहले खुद को पहचानना बहुत ही ज़रूरी है। जैसे आप है, वैसे ही अपने आप को स्वीकार करें। कभी भी ऐसे न सोचें की आपकी परिस्थितियां खराब व अनुकूल हैं, खुद पर भरोसा रखें और समय पर भी। सबकी ज़िंदगी में बुरी परिस्थितियां आती है और यही जीवन है। बस आपको उन परिस्थितियों में खुद को संभालना आना चाहिए। Positive mind से सोचे और हल निकाले। दूसरों से पहले खुद को प्यार करें और एक अच्छा इंसान बने। खुद को दुसरो से compare ना करें- अपने आप को किसी और से compare ना करें, खुद की खूबियों को पहचाने और अपने आप को स्वीकार करें। सबकी कुछ न कुछ speciality होती है, आप भी अपनी ख़ूबियाँ खोजें और उस पर डटे रहे। मेरा मानना है की आपको एक लिस्ट बनानी चाहिए जिसमे आप अपनी सारी ख़ूबियाँ नोट करें जो आपको बेहतर बनाती हैं और उस पर डटे रहे। ऐसा करने से आप इस बात से वाक़िफ़ रहेंगे की आप lovable, प्रतिभाशाली, unique और सार्थक हैं। भावनात्मक ना होए- यह ज़रूरी नहीं की आप जिसकी मदद करें वो भी आपकी मदद के लिए हमेशा खड़े रहेंगे। और जब कुछ लोग आपका साथ छोड़ देते है तब आप emotinally hurt हो जाते हैं। जो आपके ऊपर बहुत ही बुरा प्रभाव डाल सकता है। इसीलिए दुसरो से emotionally attach होने से बचे। हम उम्मीद करते है की ऊपर बताएं गए आसान तरीकों को follow करने से आप आत्मनिर्भर बन पाएंगे। यदि आपके मन में भी कुछ टिप्स हो तो ज़रूर शेयर करें।</p>
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		<title>आख़िर आत्महत्या करने से पहले क्या सोचता है, इन्सान??</title>
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		<pubDate>Sat, 14 Sep 2019 14:25:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>Suicide se pahale ka suspense?? आख़िर आत्महत्या करने से पहले क्या सोचता है, इन्सान?? आत्महत्या (Suicide) से पहले की सोच हिंदी में (facts hindi / hindi facts) आत्महत्या की कोशिश कर चुके लड़के ने बताया की, उस वक्त दिमाग में चल रही थी ये बातें, जानें हमारे इस वीडियो में !! The boy who has tried to commit suicide said that these things were going on in his mind at that time, check our video !!</p>
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		<title>मुंशी प्रेमचंद : हिंदी में निबंध</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Aug 2019 15:51:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>मुंशी प्रेमचंद हिंदी में निबंध उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद पर आधारित सम्पूर्ण हिंदी में निबंध। Essay in Hindi based on the novel Samrat Munshi Premchand, प्रेमचंद हिंदी और उर्दू के विश्व विख्यात लेखक थे। मुंशी प्रेमचन्द जी हिंदी में कहानी और उपन्यासों के लेखन के लिए एक नए मार्ग का निर्माण किया था। भूमिका: प्रेमचंद हिंदी और उर्दू के विश्व विख्यात लेखक थे। मुंशी प्रेमचन्द जी हिंदी में कहानी और उपन्यासों के लेखन के लिए एक नए मार्ग का निर्माण किया था। इन्होंने हिंदी लेखन कार्यों में एक ऐसी नींव डाली थी। उसके बिना हिंदी के विकास का अध्यापन कार्य अधुरा होता है। प्रेमचंद को मुंशी प्रेमचंद के नाम से पहचाना जाता है जो कि एक सचेत नागरिक, संवेदनशील लेखक और सकुशल प्रवक्ता थे। हमारे हिंदी साहित्य को उन्नत बनाने के लिए अनेक लेखकों ने अपना योगदान दिया है। हर लेखक का अपना महत्व होता है परन्तु मुंशी प्रेमचंद जैसा लेखक किसी देश को बड़े सौभाग्य से प्राप्त होता है। अगर उन्हें भारत का गोर्की कहा जाये तो इसमें कुछ गलत नहीं है। मुंशी प्रेमचंद जी के लोक जीवन का व्यापक चित्रण और सामाजिक समस्याओं के गहन अध्ययन को देखकर कहा जा सकता हैं कि मुंशी प्रेमचंद के उपन्यासों में भारतीय जीवन के मुंह बोलते हुए चित्र देखने प्राप्त होते हैं। प्रिय लेखक: मुंशी प्रेमचंद जी हम सबके सबसे प्रिय लेखक हैं। मुंशी प्रेमचंद ने एक दर्जन उच्चकोटि के उपन्यासों को लिखा हैं और तीन सौ से भी अधिक कहानियाँ रचकर हिंदी साहित्य को आगे बढ़ाया है। मुंशी प्रेमचन्द जी के उपन्यासों में कर्म भूमि, गोदान और सेवासदन आदि प्रसिद्ध हैं। उनकि कहानियों में कफन और पूस की रात अत्यधिक मार्मिक हैं। मुंशी प्रेमचन्द जी कि कहानियाँ जन जीवन का मुंह बोलता हुआ चित्रण प्रस्तुत करती हैं। प्रिय लगने का कारण: मुंशी प्रेमचंद जी साहित्य में अशलीलता और नग्नता के कट्टर विरोधी थे। मुंशी प्रेमचंद का मानना है कि साहित्य समाज का आयना है जो उसका ही चित्रण करता है परन्तु साथ ही साथ समाज के आगे एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत करता है जिससे लोग अपने साहित्य समाज के सामने अपना चरित्र ऊँचा उठा सकते हैं। मुंशी प्रेमचंद के उपन्यासों के अनेक पात्र धनिया, होरी, सोफी, जालपा, निर्मला आदि सभी आज भी जीते जागते पात्र ही महसुस होते हैं। गरीबों का जीवन लिखने पर उन्हें विशेष सफलता प्राप्त हुई है। प्रेमचंद जी की भाषा अत्यधिक सरल है परन्तु मुहावरो का भी प्रयोग किया गया है। भारत में हिंदी का प्रचार-प्रसार करने में मुंशी प्रेमचंद के उपन्यासों ने अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुंशी प्रेमचंद ने ऐसी भाषा का अपने लेखन में प्रयोग किया जिसे लोग आसानी से समझते और जानते थे। इसी कारण से मुंशी प्रेमचंद जी के अन्य लेखकों की तुलना में अधिक उपन्यास बिके थे। मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय परिचय : बचपन का नाम &#8211; धनपत राय श्रीवास्तव,  नाम से प्रसिद्ध हुए &#8211; मुंशी प्रेमचंद  जन्म – 31 जुलाई, 1880, लम्ही, उत्तर पश्चिम, ब्रिटिश भारत पिता – अजीब लाल माता – आनंद देवी व्यवसाय –  लेखक और उपन्यासकार भाषा – हिंदी और उर्दू राष्ट्रीयता – भारतीय प्रसिद्ध लेख – गोदान, बाज़ार-ए-हुस्न, कर्मभूमि, शतरंज के खिलाडी, गबन पत्नी- शिवरानी देवी बच्चों के नाम – श्रीपत राय, अमृत राय, कमला देवी मृत्यु – 8 अक्टूबर 1936 को 56 वर्ष की आयु में वाराणसी, बनारस स्टेट, ब्रिटिश भारत।   मुंशी प्रेमचन्द जी को भारत का उपन्यास सम्राट माना जाता हैं जिनके युग का कालखण्ड सन् 1880 से 1936 तक है। यह कालखण्ड भारत के इतिहास में बहुत महत्त्व रखता है। इस युगकाल में भारत का स्वतंत्रता-संग्राम कई महत्वपूर्ण स्तरों से गुजरा है। प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। वे एक सफल लेखक, कुशल वक्ता, जिम्मेदार संपादक एवं संवेदनशील रचनाकार थे। बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में जब हिन्दी में कार्य करने की तकनीकी व्यवस्था नहीं थीं फिर भी इतना काम करने वाला लेखक मुंशी प्रेमचंद जी अलावा कोई दूसरा नहीं हुआ।  मुंशी प्रेमचंद के बारे में प्रारंभिक जीवन: मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31जुलाई, 1880 को वनारस के पास एक गाँव लम्ही में, औपनिवेशिक भारत के टाईम हुआ था। उनके फादर अजीब राय, पोस्ट ऑफिस में एक क्लर्क का कार्य करते थे और उनकी माता आनंदी देवी एक गृहणी थी। प्रेमचंद जी के माता &#8211; पिता के चार संतान थी। मुंशी प्रेमचंद जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मदरसा, लालपुर में उर्दू और फारसी शिक्षा के रूप में ग्रहण की। उसके बाद मुंशी प्रेमचंद जी ने अपनी अंग्रेज़ी की पढाई एक मिशन स्कूल से पूर्ण किया। जब मुंशी प्रेमचंद कि आयु आठ वर्ष थी तब उनकी माता जी मृत्यु हो गयी थी। उनके पिताजी ने दूसरी शादी भी की थी। मुंशी प्रेमचंद अपने सौतेली माँ से अच्छे से घुल मिल नहीं पाये थे और ज्यादातर समय वो दुखी और तन्हाई में गुजारा करते थे। वे अकेलापन दुर करने के लिए वो अपना समय किताबे पढने में लगाया करते थे और ऐसा करते-करते वे किताबों के शौक़ीन बन गए। सन् 1897 में उनके फादर की मृत्यु हो गयी और उसके बाद मुंशी प्रेमचंद ने अपनी पढाई छोड़ दी। मुंशी प्रेमचंद जन्म और विवाह: मुशीं प्रेमचंद का जन्म वाराणसी से लगभग चार मील दूर, लमही नामक एक गांव में 31 जुलाई, 1880 को हुआ था। प्रेमचंद के पिताजी का नाम मुंशी अजायब लाल और माताजी का नाम आनन्दी देवी थी। मुंशी प्रेमचंद का बचपन गांव में बीता था। मुंशी प्रेमचंद जी का कुल दरिद्र कायस्थों का था, जिनके पास लगभग छ: बीघा जमीन थी और जिनका परिवार काफी बड़ा था। प्रेमचंद के दादा जी, मुंशी गुरुसहाय लाल, पटवारी का कार्य करते थे। उनके पिता, मुंशी अजायब लाल, डाकमुंशी का कार्य करते थे और उनका वेतन लगभग पच्चीस रुपए महिना था। उनकी मां आनन्द देवी सुन्दर, सुशील और गुणवान महिला थीं। जब मुंशी प्रेमचंद आयु पंद्रह वर्ष थी, उस समय उनका विवाह हो गया। वह विवाह उनके सौतेले नाना ने करवाया था। सन् 1905 के अंतिम दिनों में मुंशी प्रेमचंद ने शिवरानी देवी से शादी कर ली थी। शिवरानी देवी बाल-विधवा थीं। यह कहा जाता है कि दूसरी शादी के पश्चात् इनके जीवन में परिस्थितियां में कुछ बदलाव आया और आर्थिक तंगी में कमी हुई। इनके लेखन कार्य में अधिक सजगता आने लगी ।...</p>
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		<title>महादेवी वर्मा महान कवियत्री, जीवन परिचय</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Aug 2019 16:27:02 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[महादेवी वर्मा कहानियाँ]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महादेवी वर्मा जी का जीवन परिचय: महादेवी वर्मा एक महान कवियत्री का जीवन परिचय हिंदी में। &#8230; life story of Mahadevi Verma in Hindi language, महादेवी वर्मा का जन्म उत्तरप्रदेश के फर्रूखाबाद जिले में सन् 1907 ई० में हुआ था।&#8230; &#8216;महादेवी वर्मा&#8217; का जन्म उत्तरप्रदेश के फर्रूखाबाद जिले में सन् 1907 ई० में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री गोविन्द प्रसाद वर्मा था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा इन्दौर से हुई। नौ वर्ष की आयु में ही इनका विवाह बरेली के डॉक्टर स्वरूप नारायण वर्मा के साथ हुआ।  महादेवी वर्मा ने प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत विषय लेकर एम०ए० तक शिक्षा प्राप्त की। साहित्य को लेकर उनमें बचपन से ही लगाव था । इन्होने प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रधानाचार्य के पद ग्रहण कर कार्य  किया। भारत सरकार ने इन्हें &#8216;पद्मभूषण&#8217; की उपाधि प्रदान की । इन्होने मासिक पत्रिका चांद का अवैतनिक का भी संपादन किया। सन 1987 ई० में इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में उनका निधन हो गया। महादेवी वर्मा ने अपने बच्चपन में ही मीरा, सूर और तुलसी जैसे भक्त कवियों की रचनाओं का गहन अध्ययन किया था। यही वो कारण है जो कि ये कवि उनके प्रेरणा स्रोत बने। महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाये निम्न प्रकार हैं&#8211; &#8216;दिपशिखा&#8217;, &#8216;नीहार&#8217;, &#8216;अतीत के चलचित्र&#8217;, &#8216;सांध्यगीत&#8217;, &#8216;निरजा&#8217;, &#8216;यामा&#8217;, &#8216;स्मृति की रेखाएं&#8217;, &#8216;श्रृंखला की कड़ियां&#8217; आदि। आन्नद और प्रेम की वेदना को अपने जीवन में अंगीकार करने वाली भक्ति काल की महा कवयित्री मीरा के समान वर्तमान युग की विश्व प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा से कौनसा साहित्य प्रेमी प्रभावित नहीं हुआ होगा। हिन्दी साहित्य में उन्हें सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।   महादेवी जी हिन्दी साहित्य की महान हस्ती, कवियित्री और  विश्व प्रसिद्ध लेखिका थी, उन्हें हिन्दी साहित्य में छायावाद युग के चार मुख्य स्तंभों में से एक के रूप में पहचाना जाता है। महादेवी वर्मा जी ने हिंदी साहित्य के जगत में एक बेहतरीन गद्य लेखको वर्मा अपनी जगह बनाई थी। महादेवी जी एक विलक्षण प्रतिभा वाली एक महान कवियित्री थी, जिन्हें हिन्दी साहित्य के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने ”सरस्वती” की भी संज्ञा प्रदान की थी। इसके अलावा उन्हें आधुनिक युग की &#8220;मीरा” का भी दर्जा भी प्राप्त हुआ था, क्योंकि उन्होंने अपनी कविताओं में एक प्रेमी से दूर होने का कष्ट एवं इसके विरह और पीड़ा का बेहद भावनात्मक रुप से वर्णन किया । महादेवी वर्मा जी मशूहर कवियित्री तो थी हीं, इसके साथ ही वे एक महान समाज सुधारक भी रही थीं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर विशेष रूप से जोर दिया था तथा महिला शिक्षाको बढ़ावा देने के पक्ष में थी। यही नहीं महादेवी वर्मा जी ने तो महिलाओं को समाज में उनके उचित अधिकार दिलवाने और उचित आदर-सम्मान प्रदान कराने के लिए कई महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम उठाए थे। इसके साथ ही महादेवी वर्मा जी ने कुछ ऐसी रचनाएं भी रचि थीं, जिनमें उन्होंने महिलाओं के प्रति लोगों की संकीर्ण और तुच्छ मानसिकता पर आघात भी किया था एवं समाज में महिलाओं की दयनीय स्थिति एवं उन पर हो रहे अत्याचार एवं शोषण के दर्द को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया था। महादेवी वर्मा जी ने अपनी कृति “श्रृंखला की कड़ियां” के द्वारा भारतीय समाज की महिलाओं की दुर्दशा का भावपूर्ण एवं ह्रद्य को छू जाने वाला वर्णन प्रस्तुत किया था। महादेवी वर्मा के बारे में:  भारतीय साहित्य की उस महान कवियित्री महादेवी वर्मा जी के जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में– महादेवी जी का जन्म एवं प्रारंभिक जीवन हिन्दी साहित्य की महान हस्ती महादेवी वर्मा जी का जन्म 26 मार्च, साल 1907 में उत्तरप्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के एक सामान्य परिवार में हुआ था, महादेवी वर्मा जी के परिवार में कई वर्षों से किसी कन्या ने जन्म नहीं लिया था, जिससे महादेवी वर्मा जी को उनके अपने परिवार वालों से बेहद लाड़-प्यार मिला था और बेहद अच्छे तरीके से उनका पालन-पोषण किया गया था। वे अपने सभी भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। महादेवी वर्मा जी के पिता गोविंद प्रसाद वर्मा एक जाने-पहचाने शिक्षक थे और उन्होंने वकालत भी की थी, जबकि उनकी माता हेमरानी देवी जी एक अध्यात्मिक महिला थीं, जो कि भगवान की भक्ति में हमेशा लगी रहती थीं और धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में उनका अत्यधिक विश्वास था। महादेवी वर्मा जी की शिक्षा  महादेवी जी के माता-पिता का ध्यान प्रारंभ से ही शिक्षा की ओर होने के कारण उन्हें घर पर ही संगीत, अंग्रेजी,  तथा संस्कृत की शिक्षा प्रदान कि गई। साल 1912 में महादेवी वर्मा जी ने इंदौर के मिशन स्कूल से अपने शुरुआती पढ़ाई पूर्ण की। इसके बाद महादेवी वर्मा जी ने इलाहाबाद में एक  &#8220;क्रास्थवेट कॉलेज&#8221; में प्रवेश लिया। आपको जानकारी करा दें कि उनको बचपन से ही लिखने का बेहद शौक था, महज 7 साल की छोटी सी आयु में ही उन्होंने कविताएं लिखना प्रारंभ कर दिया था। वहीं जब महादेवी जी ने 1925 में अपनी मैट्रिक तक की परीक्षा प्राप्त की तब उनकी कविताओं के चर्चे पूरे देश में होने लगे थे और देश की प्रसिद्ध पत्र – पत्रिकाओं में उनकी कविताएं आने लगी थीं। और महादेवी जी की लोकप्रियता एक प्रसिद्ध कवियित्री के रुप में पहचानी जाने लगी थी। इसके पश्चात 1932 ई. में विश्व प्रसिद्ध लेखिका महादेवी जी ने उच्च शिक्षा ग्रहण करने के मकसद से इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से संस्कृत में एम.ए. की मास्टर डिग्री हासिल की थी। वहीं उस समय तक उनकी दो बङी कृतियां रश्मि और नीहार प्रकाशित हो चुकी थीं। जिन्हें उनके पाठकों द्धारा बेहद पसंद किया गया था। कवित्रियी महादेवी वर्मा जी का वैवाहिक जीवन भारतीय समाज में बाल विवाह की कुप्रथा के तहत महादेवी वर्मा जी के विद्यार्थी जीवन के दौरान ही 1916 ई. में उनका विवाह डॉ. स्वरूप नारायण वर्मा से कर दी गई। लेकिन, महादेवी वर्मा जी ने विवाह के पश्चात भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और वे प्रयागराज (इलाहाबाद) में एक हॉस्टल में रहकर अध्ययन करती रहीं। जबकि महादेवी वर्मा जी के पति स्वरुप नारायण वर्मा जी लखनऊ मेडिकल कॉलेज के बोर्डिंग हाउस में निवास करते थे। वहीं महादेवी जी अन्य महिलाओं से थोड़ी अलग थी, सिर्फ उन्हें तो अपने जीवन में साहित्य से ही लगाव था, तथा प्रेम संबंधं और विवाह बंधन उनके लिए कोई खास रुचिकर नहीं थे। हालांकि, अपने पति के साथ महादेवी जी...</p>
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