ब्रह्माजी के थैले – Moral Story in Hindi – हिंदी कहानी

Moral Story in Hindi

इस संसार को बनाने वाले ब्रह्माजी ने एक बार मनुष्य को अपने पास बुलाकर पूछा – ” तुम क्या चाहते हो |”

मनुष्य ने कहा – ” मैं उन्नति करना चाहता हूं, सुख-शांति चाहता हूं और चाहता हूं कि सब लोग मेरी प्रशंसा करें |

ब्रह्माजी ने मनुष्य के सामने दो थेले धर दिए | वह बोले – ” इन थेलो को ले लो; इनमें से एक थैले में तुम्हारे पड़ोसी की बुराइयां भरी हैं | उसे पीठ पर लाद लो | उसे सदा बंद रखना | न तुम देखना न दूसरे को दिखाना | दूसरे थैले में तुम्हारे दोस भरे हैं | उसे सामने लटका लो और बार-बार खोलकर देखा करो |

Moral Story in Hindi

मनुष्य ने दोनों थैले उठा लिए | लेकिन उससे एक भूल हो गई उसने अपनी बुराइयों का थैला पीठ पर लाद लिया और उसका मुंह कसकर बंद कर दिया | अपने पड़ोसी की बुराइयों से भरा थैला उसने सामने लटका लिया |उसका मुंह खोलकर वह है उसे देखता रहता है और दूसरों को भी दिखाता रहता है | इससे उसने जो वरदान मांगे थे, वह सभी उल्टे हो गए | वह अवनति करने लगा उसे दु:ख और अशांति मिलने लगी | सब लोग उसे बुरा बताने लगे |

 Moral of The Story :- 
” तुम मनुष्य की वह भूल सुधार लो तो तुम्हारी उन्नति होगी | तुम्हें सुख-शांति मिलेगी | जगत में तुम्हारी प्रशंसा होगी | तुम्हे करना यह है, कि अपने पड़ोसी और परिचितों के दोस देखना बंद कर दो और अपने दोशो पर सदा दृष्टि रखो |”
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Written by lokhindi
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